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संघर्ष समिति ने संवाद व सहभागिता आधारित प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की मांग

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि ऊर्जा निगमों में कर्मचारियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध लगातार की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों, लिखित समझौतों के अनुपालन में हो रही अनदेखी तथा कर्मचारी संगठनों के साथ संवादहीनता के कारण कार्य वातावरण लगातार प्रभावित हो रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर है।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि ऊर्जा निगमों में तत्काल जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल (JMC) का गठन किया जाए तथा कर्मचारियों और अभियंताओं के विरुद्ध चल रही सभी उत्पीड़नात्मक एवं दमनात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं। संघर्ष समिति का कहना है कि प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच नियमित संवाद एवं सहयोग की व्यवस्था स्थापित होने से उपभोक्ताओं को बेहतर, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी तथा मुख्यमंत्री के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा।

संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के समय जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य करती थी। परिषद के पुनर्गठन के बाद दिनांक 25 जनवरी, 2000 को हुए लिखित समझौते में भी जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल के गठन और संचालन का स्पष्ट प्रावधान किया गया था। इसके उपरांत भी कुछ वर्षों तक यह व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित होती रही और अनेक जटिल समस्याओं का समाधान आपसी संवाद के माध्यम से संभव हुआ।

संघर्ष समिति ने बताया कि जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल में प्रबंधन एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं तथा नियमित बैठकों के माध्यम से विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी एवं कार्मिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ एवं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की परंपरा रही है। ऐसी व्यवस्था से पारस्परिक विश्वास बढ़ता है, समस्याओं का समयबद्ध समाधान होता है तथा समझौतों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी संभव होती है।

संघर्ष समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों तथा मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित वार्ता की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के साथ पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा लगभग एक वर्ष से कोई औपचारिक वार्ता नहीं की गई है। इससे कर्मचारियों की समस्याएं लंबित होती जा रही हैं तथा असंतोष का वातावरण बन रहा है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि अनेक लिखित समझौतों के बावजूद उनके क्रियान्वयन में लगातार विलंब एवं उपेक्षा की जा रही है तथा विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों और अभियंताओं का उत्पीड़न जारी है। इस कारण ऊर्जा निगमों में स्वस्थ कार्य संस्कृति प्रभावित हुई है और कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित हुआ है।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि संवाद और समाधान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनः स्थापित नहीं किया गया तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं की गईं तो कर्मचारियों में व्याप्त असंतोष और अधिक बढ़ सकता है। संघर्ष समिति ने एक बार पुनः आग्रह किया कि प्रबंधन टकराव के स्थान पर सहभागिता, संवाद और विश्वास की नीति अपनाए तथा जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल का गठन कर समस्याओं के समाधान का संस्थागत मार्ग प्रशस्त करे।

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