लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर संवादहीनता तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां जारी रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रबंधन के इस रवैये से ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे तौर पर बिजली व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। ये जानकारी संघर्ष समिति के शैलेन्द्र दुबे,संयोजक ने दी।
उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन अपनी हठधर्मिता त्यागकर संघर्ष समिति के साथ सार्थक संवाद शुरू करे तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ले। आज सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्वस्थ कार्य वातावरण तथा पर्याप्त मानव संसाधन दोनों अनिवार्य हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई अधिकांश उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां निजीकरण के उद्देश्य से प्रेरित हैं। बड़े पैमाने पर 45 प्रतिशत से अधिक संविदा कर्मियों को हटाए जाने की कार्रवाई भी इसी नीति का हिस्सा है। वर्तमान में बिजली व्यवस्था पर सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव संविदा कर्मियों की भारी संख्या में की गई छंटनी के कारण पड़ा है। इसके अतिरिक्त, सामान्य धरना-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले बिजली कर्मियों के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संवाद शुरू करें
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