लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा वितरण क्षेत्र में लागू की गई वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग प्रणाली के स्वतंत्र मूल्यांकन करने तथा उसकी प्रभावशीलता की समीक्षा करने के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय पूरी तरह उचित, समयोचित एवं जनहित में है। संघर्ष समिति का प्रारम्भ से ही स्पष्ट मत रहा है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग एक वैज्ञानिक,अव्यावहारिक एवं उपभोक्ता-विरोधी व्यवस्था है, जिसे तत्काल समाप्त कर पूर्व की प्रभावी व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग ने स्वयं यह माना है कि वर्टिकल व्यवस्था के प्रभाव का स्वतंत्र एवं पेशेवर एजेंसी द्वारा मूल्यांकन कराया जाना चाहिए तथा जहां भी कमियां सामने आएं वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि उपकेंद्रों एवं फीडरों पर अनुरक्षण व्यवस्था की पर्याप्त समीक्षा की जाए तथा मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि विद्युत आपूर्ति एवं उपभोक्ता सेवाएं प्रभावित न हों। यह वही मुद्दे हैं जिन्हें संघर्ष समिति पिछले कई वर्षों से लगातार उठाती रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू होने के बाद उपभोक्ताओं की समस्याएं कई गुना बढ़ गई हैं। उपभोक्ता यह समझ ही नहीं पाता कि उसकी शिकायत का समाधान किस अधिकारी अथवा किस इकाई द्वारा किया जाएगा। बिजली आपूर्ति, अनुरक्षण, राजस्व तथा अन्य कार्यों के अलग-अलग विभाजन के कारण जवाबदेही समाप्त हो गई है, समन्वय कमजोर हुआ है तथा शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ा है।
हटाए गए संविदा कर्मियों को सेवा में वापस लिया जाए: संघर्ष समिति
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