हर्रैया सतघरवा के गौरा माफी गांव में बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने वन विभाग से इन उत्पाती बंदरों को पकड़ने की मांग की है। पिछले छह महीनों में इन लंगूर बंदरों के हमलों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बंदरों के हमलों में कई महिलाओं के हाथ, पैर और कमर में फ्रैक्चर हुए हैं। रमेश, वसीम, प्रभुदयाल, लल्लन, मिथुन, रवि, विकास, आदर्श, लालजी, शिवकुमार, बाल गोविन्द, किशोरी, कमला, रंजीत और नंदराम सहित कई स्थानीय लोगों ने इस गंभीर समस्या पर चिंता जताई। गौरा माफी के साथ-साथ फतेहरा, पूरनपूर, भुजेहरा, लछुआपुर, कमदा और गुलरिहा हिसामपुर जैसे आसपास के गांवों के निवासी भी बड़े बंदरों के उत्पात से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दो दर्जन से अधिक बंदर लगातार लोगों को परेशान कर रहे हैं। इस संबंध में वन विभाग को कई बार सूचित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। शनिवार दोपहर को रेंजर बृजेश सिंह परमार अपनी टीम के साथ गौरा माफी गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों को नकद सहायता राशि प्रदान की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। रेंजर ने ग्रामीणों को बताया कि जल्द ही गांव में पिंजरे लगाकर उत्पाती बंदरों को पकड़ा जाएगा और उन्हें जंगल में सुरक्षित छोड़ा जाएगा। रेंजर बृजेश सिंह परमार ने पुष्टि की कि गांव में एक टीम तैनात कर लंगूर बंदरों को पकड़ा जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने की भी सलाह दी।
गौरा माफी में बंदरों का आतंक,:2 दर्जन से अधिक बंदरों ने गांव में मचाया उत्पात; वन विभाग से पकड़ने की मांग
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