रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।
चिउटहां/महराजगंज।
निचलौल-पुरैना मुख्य मार्ग पर शनिवार तड़के एक बार फिर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। लखनऊ से आम लादकर निचलौल के एक व्यापारी के पास जा रही पिकअप (UP 32 QN 2113) पुरैना मार्ग पर जमुई पंडित के पास स्थित ‘खूनी पुलिया’ के पास अनियंत्रित होकर पलट गई। गनीमत रही कि चालक ने किसी तरह कूदकर अपनी जान बचाई, वरना एक बार फिर किसी का घर उजड़ सकता था। यह कोई पहला हादसा नहीं है। स्थानीय लोग इस पुलिया को ‘खूनी पुलिया’ के नाम से पुकारने लगे हैं, क्योंकि यहाँ आए दिन गाड़ियां पलटती हैं, लोग गंभीर रूप से चोटिल होते हैं और कई मासूम अपनी जान भी गंवा चुके हैं। दुर्घटना की मुख्य वजह इंजीनियरिंग की बेहद गंभीर लापरवाही है। पुलिया के दोनों तरफ का मुख्य मार्ग काफी चौड़ा है, लेकिन जैसे ही गाड़ियां पुलिया के पास पहुंचती हैं, रास्ता अचानक बेहद संकरा (तंग) हो जाता है। जिससे तेज रफ्तार में आने वाले वाहन चालकों को अचानक पुलिया के संकरेपन का अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।इस मुख्य मार्ग के नीचे से नहर गुजरती है, जिसके चलते यह पुलिया सीधे तौर पर नहर विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। बार-बार होते हादसों और बहते खून के बावजूद विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। जब इस संबंध में विभाग से बात की गई, तो उनका वही पुराना, रटा-रटाया ‘सरकारी’ जवाब सामने आया:
> “मामला संज्ञान में है। नई पुलिया के निर्माण के लिए फाइल तैयार कर ली गई है। जैसे ही उच्चाधिकारियों से संस्तुति (मंजूरी) मिलेगी, निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।”
बड़ा सवाल यह हैं कि और कितनी मौतों के बाद मिलेगी संस्तुति।जनता अब विभाग के इस ‘कागजी विकास’ और फाइल-फाइल के खेल से आजिज आ चुकी है।राहगीरों का कहना है कि क्या विभाग को किसी और बड़े हादसे या मौतों का इंतजार है? जब रास्ता संकरा है और लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो इस फाइल को ‘आपातकालीन’ श्रेणी में रखकर अब तक मंजूरी क्यों नहीं दिलाई गई। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस खूनी पुलिया का चौड़ीकरण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन को अब कागजों से बाहर निकलकर जमीन पर काम दिखाना होगा, ताकि इस मार्ग पर सफर करने वाला हर नागरिक सुरक्षित अपने घर लौट सके।












