Homeउत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)नवजात की मौत के 14 दिन बाद नहीं आई रिपोर्ट:पीड़ित परिवार ने...

नवजात की मौत के 14 दिन बाद नहीं आई रिपोर्ट:पीड़ित परिवार ने एसपी-सीएमओ से लगाई गुहार, जनता सेवा हॉस्पिटल की जांच एक सप्ताह में पूरी होनी थी


सिद्धार्थनगर के इटवा स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल में नवजात शिशु की मौत का मामला अब स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने 26 मई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन 14 दिन बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है। मंगलवार को पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन और सीएमओ डॉ. रजत कुमार चौरसिया से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों का आरोप है कि नवजात की मौत जैसे गंभीर मामले में जांच अनावश्यक रूप से लंबी खींची जा रही है। ऑपरेशन करने वाले की पहचान बनी विवाद का केंद्र मामले का सबसे बड़ा विवाद ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति की पहचान को लेकर सामने आया है। पीड़िता वंदना ने एक वीडियो बयान जारी कर दावा किया है कि 23 मई की रात उनका ऑपरेशन डॉ. डाली शर्मा ने नहीं किया था। वंदना के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान प्रमोद कुमार यादव, प्रवीण कुमार यादव और एक नर्स मौजूद थे। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने जांच के दौरान डॉ. डाली शर्मा को सर्जन बताते हुए उनका बयान दर्ज कराया है। दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास होने से मामला और उलझ गया है। मोबाइल लोकेशन और सीडीआर जांच की मांग पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि डॉ. डाली शर्मा वास्तव में ऑपरेशन के समय अस्पताल में मौजूद थीं, तो उनकी मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराई जानी चाहिए। परिजनों का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना के समय ऑपरेशन थिएटर में वास्तव में कौन मौजूद था। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर, मोबाइल लोकेशन, सीडीआर, ऑपरेशन थिएटर रजिस्टर और उपचार संबंधी अभिलेखों की जांच की भी मांग की है। डीवीआर पुलिस के कब्जे में, फिर भी नहीं सामने आए तथ्य मामले को गंभीर इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पुलिस पहले ही अस्पताल प्रबंधन और संबंधित स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चुकी है। साथ ही अस्पताल का डीवीआर भी अपने कब्जे में ले चुकी है। इसके बावजूद अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर की जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो जांच अभी तक किसी निष्कर्ष पर क्यों नहीं पहुंची। अंतिम चेतावनी नोटिस ने भी बढ़ाए सवाल जांच अधिकारी एवं एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. आर.जी. सिंह द्वारा अस्पताल प्रबंधन को जारी अंतिम चेतावनी नोटिस भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नोटिस में इलाज से जुड़े चिकित्सक का बयान तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि जांच शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, तो अब तक संबंधित चिकित्सक का बयान क्यों दर्ज नहीं हो सका। अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली जांच के घेरे में जांच अब केवल नवजात की मौत तक सीमित नहीं रह गई है। परिजनों ने मांग की है कि गर्भावस्था के दौरान उपचार किसने किया, दवाइयां किसने लिखीं, पर्चों पर दर्ज हस्तलेखन किसका है, अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक के रूप में कौन पंजीकृत हैं और घटना के समय चिकित्सा सेवाएं वास्तव में कौन दे रहा था, इन सभी पहलुओं की जांच की जाए। एक सप्ताह की जांच 14 दिन बाद भी अधूरी नवजात की मौत के बाद उठे सवाल अब सीधे अस्पताल की कार्यप्रणाली और जांच की पारदर्शिता से जुड़ गए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते साक्ष्य आधारित और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल पूरे जिले की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच यह तय करेगी कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई, ऑपरेशन थिएटर में उस रात कौन मौजूद था, इलाज किसने किया और जवाबदेही किसकी बनती है। सीएमओ बोले- जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि जनता सेवा हॉस्पिटल की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जांच टीम बहुत जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments