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जनता प्यासी, ‘माननीय’ मुस्कुरा रहे: मिठौरा के बरोहिया चौराहे का वाटर ATM बना शो-पीस


रिपोर्ट:गजेंद्र कुमार गुप्त।

महराजगंज।राजनीति में काम हो न हो, लेकिन चेहरे की चमक और फोटो चमकाने की होड़ हमेशा दुरुस्त रहती है। कुछ ऐसा ही नजारा मिठौरा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा बरोहिया चौराहे पर देखने को मिल रहा है। यहाँ लगा वाटर ATM महीनों से ‘यांत्रिक खराबी’ का शिकार होकर खुद कड़ाके की धूप में जल रहा है, लेकिन उस पर लगी नेताओं की तस्वीरें आज भी जनता को चिढ़ाती हुई मुस्कुरा रही हैं।


प्यासी जनता, चमकते चेहरे
इस वाटर ATM की स्थापना मिठौरा ब्लॉक प्रमुख उर्मिला गुप्ता द्वारा कराई गई थी। मशीन पानी दे या न दे, लेकिन इस पर ब्लॉक प्रमुख के पति रामहरख गुप्त और भाजपा के तमाम जन प्रतिनिधियों की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें बखूबी अपनी शोभा बढ़ा रही हैं। स्थानीय राहगीरों का कहना है कि नेताओं की ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं—”तुम्हें पानी मिले न मिले, हमारी मुस्कुराहट में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।” कड़ाके की इस धूप में जब राहगीर पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते हैं, तब नेताओं के ये हंसते चेहरे उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करते हैं।
व्यस्त चौराहा, बूंद-बूंद को तरसते यात्री
बता दें कि बरोहिया चौराहा बेहद भीड़-भाड़ वाला इलाका है। यह परिवहन विभाग का एक प्रमुख फेयर बस स्टॉप भी है, जहाँ से रोजाना दर्जनों ग्राम सभाओं के यात्रियों का आना-जाना होता है। भीषण गर्मी के इस मौसम में यात्रियों को उम्मीद थी कि इस वाटर ATM से उन्हें शीतल जल नसीब होगा, लेकिन प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण यह मशीन महज एक ‘शो-पीस’ बनकर रह गई है।


जिम्मेदारी से भागते अधिकारी और कागजी पेंच
इस गंभीर समस्या को लेकर जब ‘MNT News’ की टीम ने खंड विकास अधिकारी (BDO) राहुल सागर से संपर्क करने का प्रयास किया, तो किन्हीं कारणों से उनका फोन नहीं उठा। वहीं ब्लॉक स्तर के अन्य अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की मरम्मत के लिए बाकायदा फंड (धनराशि) होता है, जिससे काम कराया जाता है।
लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वाटर ATM मशीन को अभी तक तकनीकी या कागजी रूप से ग्राम सभा को स्थानांतरित (हैंडओवर) ही नहीं किया गया है। ऐसे में ग्राम प्रधान चाहकर भी सरकारी नियमों के फेर में बंधे होने के कारण इसकी मरम्मत नहीं करवा पा रहे हैं।
कब जागेगा सिस्टम?
सवाल यह उठता है कि जब उद्घाटन के समय वाहवाही लूटने के लिए बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर और फोटो लगा दिए जाते हैं, तो खराबी आने पर उसे ठीक कराने की सुध क्यों नहीं ली जाती? क्या विकास सिर्फ नेताओं की तस्वीरों तक ही सीमित रहेगा, या बरोहिया चौराहे पर आने वाले प्यासे यात्रियों को कभी इस वाटर ATM से ठंडा पानी भी नसीब होगा? जनता अब कागजी पेंच से इतर समाधान चाहती है।

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