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बस्ती के रामनगर विकास खंड की नरकटहा ग्राम पंचायत स्थित कुआनो नदी के पगारे घाट पर स्थायी पुल का अभाव है। वर्षों से पुल की मांग कर रहे लगभग 10 हजार ग्रामीण हर बरसात में जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के बावजूद पुल निर्माण का सपना अब तक अधूरा है। बरसात खत्म होने के बाद ग्रामीण अपने श्रमदान से लकड़ी का एक अस्थायी पुल बनाते हैं। यह पुल साइकिल और बाइक से आवाजाही के लिए उपयोग होता है। हालांकि, बारिश शुरू होते ही कुआनो नदी का तेज बहाव इस अस्थायी पुल को बहा ले जाता है, जिसके बाद नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन बचता है। पगारे घाट से रामनगर और गौर विकास खंड के दर्जनों गांवों की करीब 10 हजार आबादी प्रतिदिन आवागमन करती है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें गौर और बभनान के विद्यालयों तक पहुंचने के लिए रोज नाव का सहारा लेना पड़ता है। अभिभावक हर दिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। पुल के अभाव में चार पहिया वाहनों को केवल छह किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लगभग 22 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार सांसद और विधायकों से पुल निर्माण की मांग की है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले।
सपा विधायक अतुल चौधरी ने जानकारी दी कि उन्होंने कई बार विधानसभा में यह मुद्दा उठाया है और शासन को पत्र भी भेजे हैं, लेकिन पुल के लिए बजट स्वीकृत नहीं हो रहा है। वहीं, सपा विधायक राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कप्तानगंज और रुधौली विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने वाले इस पुल की मांग पिछले चार वर्षों से की जा रही है, पर अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पगारे घाट पर स्थायी पुल बनने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी। इसके साथ ही, यह क्षेत्र के विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।
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बस्ती के पगारे घाट पर पुल नहीं:हर बरसात में 10 हजार लोग नाव से करते हैं आवागमन
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