सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोटन के पास स्थित सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक में प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने आशा बहू पुष्पा, डॉक्टर नज़रुल हसन, जीएनएम पूजा जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने इस टीम का गठन किया है, जिसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच समिति में डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता, सीएचसी लोटन के अधीक्षक डॉ. अमित चौधरी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मौर्य शामिल हैं। यह समिति नवजात की मौत के वास्तविक कारणों, प्रसव के दौरान अपनाई गई चिकित्सीय प्रक्रिया, अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों, संबंधित चिकित्साकर्मियों की भूमिका, रेफरल प्रक्रिया और अस्पताल की वैधानिक स्थिति की विस्तृत जांच करेगी। यह मामला 2 जून को सामने आया था। मृतक नवजात के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोटन ले जाया गया था। वहां प्रारंभिक जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बावजूद आशा बहू ने उन्हें जिला अस्पताल न ले जाकर निजी सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक पहुंचा दिया। यहीं बाद में प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल पहुंचने पर दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया और देर शाम प्रसव प्रक्रिया शुरू की गई। आरोप है कि इस दौरान महिला के पेट पर दबाव डालकर डिलीवरी कराने का प्रयास किया गया, जिससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने काफी देर तक इसकी जानकारी छिपाए रखी और स्थिति को सामान्य बताने का प्रयास करता रहा।
नवजात मौत मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित:सिद्धार्थनगर में आशा बहू, डॉक्टर, जीएनएम व अस्पताल प्रबंधक समेत चार पर पुलिस पहले ही मुकदमा ्र
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