सिद्धार्थनगर जनपद में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) वीरेन्द्र कुमार की अदालत ने 9 अप्रैल गुरुवार को यह फैसला सुनाया। यह प्रकरण थाना मिश्रौलिया क्षेत्र से संबंधित है, जहां वर्ष 2016 में मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 376/34, 504 और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत चल रही थी। अदालत ने अभियुक्त कमलेश गुप्ता उर्फ बाधे पुत्र रामानंद और रम्भा पत्नी गंगाराम, निवासी चेतिया, थाना मिश्रौलिया को दोषी पाया। दोनों को नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध में 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर ₹10,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष को न्यायालय में प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों के सुदृढ़ प्रस्तुतीकरण के कारण सफलता मिली। अभियोजन की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पवन कुमार पाठक ने मजबूती से पक्ष रखा। न्यायालय में पैरवी कर रहे मुख्य आरक्षी अमरजीत और संबंधित पुलिस टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में आया यह फैसला पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और प्रभावी पैरवी भविष्य में भी जारी रहेगी, ताकि अपराधियों को समयबद्ध सजा मिल सके और कानून का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
नाबालिग से दुष्कर्म के दो दोषी को सजा:सिद्धार्थनगर में अदालत ने 7-7 साल की कारावास की सजा सुनाई
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