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पत्नी से मांग रहा था गुजारा भत्ता, हाई कोर्ट ने लगा दिया 15 लाख का जुर्माना

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक और गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले में रोचक फैसला सुनाया है। अपनी पत्नी से गुजारा भत्ता मांग रहे एक शख्स को फटकार लगाते हुए हाई कोर्ट ने उसी पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। कोर्ट का मानना है कि यह याचिका बेवजह परेशान करने के लिए और झूठे बहाने बनाकर दायर की गई है। कोर्ट ने यह भी पाया है कि याचिका दायर करने वाला शख्स शारीरिक तौर पर पूरी तरह सक्षम है। हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने तथ्यों को छिपाने और पत्नी को नुकसान पहुंचाने के चलते इस शख्स पर 15 लाख रुपये हर्जाना भी लगाया है।

इस मामले में कोर्ट ने कहा है, ‘शारीरिक रूप से सक्षम और वकालत के पेशे में मौजूद याचिकाकर्ता ने न केवल अपने पक्ष में दिए गए गुजारा भत्ते के आदेश को छिपाया बल्कि अपनी पत्नी द्वारा लिए गए पर्सनल लोन का पैसा भी अपने विलासतापूर्ण जीवन और शराब पर उड़ा डाला।’ मामले के तथ्यों के अनुसार, इस कपल की शादी 18 मई 2019 को हुई थी। उस समय दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। विवाह के बाद पत्नी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपर निजी सचिव के पद पर नौकरी मिल गई जबकि पति लॉ ग्रेजुएट और रजिस्टर्ड वकील होने के बावजूद बेरोजगार रहा।

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पत्नी के नाम पर ले लिए पर्सनल लोन

कुछ समय बाद दोनों के बीच झगड़ा होने लगा जिसके बाद पति ने इटावा की परिवार अदालत में गुजारा भत्ते का आवेदन किया, जहां उसके पक्ष में फैसला आया लेकिन इस निर्णय के खिलाफ प्रयागराज की परिवार अदालत में याचिका लंबित होने के कारण उसने आय का कोई स्रोत नहीं होने का दावा करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया, ’10 नवंबर 2020 को पति ने एक जमीन खरीदने का झूठा बहाना बनाकर उसे भरोसे में लिया और हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच स्थित एसबीआई ब्रांच में उसके वेतन खाते के आधार पर 11,50,000 रुपये का पर्सनल लोन ले लिया।’

पत्नी ने अपनी याचिका में कहा है, ‘याचिकाकर्ता ने 6 अक्टूबर 2022 को एसबीआई की झलवा (प्रयागराज) ब्रांच से पत्नी के वेतन खाते से फिर 13,56,000 रुपये का पर्सनल लोग लिया। तब से वह 26,020 रुपये की EMI भर रही है और वह अक्टूबर 2028 तक भरती रहेगी। वह धोखाधड़ी से लोन के पैसे यूपीआई के जरिए अपने खाते में ट्रांसफर करता रहा और उसने 13,56,000 रुपये शराब पीने और अय्याशी में उड़ा दिए।’ अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता से आजिज आकर पत्नी ने 20 मई 2025 को तलाक की याचिका दायर की और पति ने मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर गुजारा भत्ते के लिए आवेदन किया।

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कोर्ट ने दिया था गुजारा भत्ता देने का आदेश

एटा की परिवार अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए अंतरिम गुजारा भत्ते के तौर पर 5,000 रुपये प्रति माह और मुकदमा खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का भुगतान करने का पत्नी को निर्देश दिया। इस आदेश के खिलाफ पत्नी ने 15 सितंबर 2025 को पुनरीक्षण याचिका दायर की, जो प्रयागराज की परिवार अदालत में लंबित है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पूरे आचरण पर गौर करने के बाद कहा, ‘यह कहने की जरूरत नहीं है कि लोन की पूरी रकम का का गलत इस्तेमाल याचिकाकर्ता पति ने किया है और यह बात पैसे निकालने के तरीके से स्पष्ट है।’

हाई कोर्ट ने यह भी कहा, ‘मौजूदा याचिका में किसी तरह का दखल वांछित नहीं है और याचिका खारिज किए जाने योग्य है। याचिकाकर्ता अपनी पत्नी को छह महीने के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 15 लाख रुपये हर्जाने का भुगतान करेगा।’ अदालत ने 23 अप्रैल के निर्णय में कहा, ‘अगर हर्जाने के पैसे जमा नहीं किए जाते हैं तो इटावा के जिला मजिस्ट्रेट, याचिकाकर्ता को दिया गया समय समाप्त होने पर तीन महीने के भीतर भू-राजस्व के बकाया के तौर पर यह राशि वसूल करेंगे। जिला मजिस्ट्रेट इस आदेश की प्रति मिलने के तुरंत बाद एक समिति गठित कर याचिकाकर्ता के स्वामित्व वाली चल एवं अचल संपत्तियों की जांच भी कराएंगे।’

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