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‘उनके लिए नियम क्यों बदले’, विनेश फोगाट की याचिका पर WFI को फटकार

घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की खातिर पहलवान विनेश फोगाट को ‘अयोग्य’ घोषित करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को कड़ी फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक विशेषज्ञ पैनल गठन करने का निर्देश दिया है, जो एशियाई खेलों में चयन के लिए विनेश फोगाट की योग्यता का मूल्यांकन करेगा।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूएफआई का प्रतिष्ठित एथलीटों को हिस्सा लेने की अनुमति देने की अपनी पुरानी प्रथा से हटना बहुत कुछ कहता है।

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विवाद चाहे जो हो, कुश्ती को नुकसान क्यों पहुंचना चाहिए?

विनेश फोगाट ने अदालत से ट्रायल में मौका देने का आग्रह किया और 9 मई को जारी कारण बताओ नोटिस पर सवाल उठाए। अदालत ने भी कारण बताओ नोटिस पर नाराजगी जाहिर की और पूछा कि आखिर क्यों यह न मान लिया जाए कि डब्ल्यूएफआई ने उन्हीं के लिए चयन मानदंड बदल दिए थे। वह जुलाई 2025 में मां बनीं। अभी मई का महीना चल रहा है।

अदालत ने कहा कि वह (विनेश) अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान हैं। ऐसा क्यों नहीं माना जा सकता कि आपने उनके लिए (चयन के नियम) बदल दिए? झगड़ा या विवाद चाहे जो भी हो, खेल के हित को नुकसान क्यों पहुंचना चाहिए? हमारे देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है तो क्या यह किसी व्यक्ति के लिए नुकसान का कारण बनना चाहिए?

अपनी मौखिक टिप्पणी में हाई कोर्ट ने आगे कहा, ‘सर्कुलर में किया गया बदलाव ही सब कुछ बयां कर देता है। आप इस तरह का बर्ताव न करें। यह खेल के सर्वोत्तम हित में नहीं है। पिछले सर्कुलर से हटकर किया गया यह बदलाव बहुत कुछ कहता है।’

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क्या है पूरा मामला?

डब्ल्यूएफआई ने 26 जून 2026 तक विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की खातिर अयोग्य घोषित किया था। हालांकि इसके बावजूद विनेश ने गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था।

अयोग्य घोषित करने के पीछे संघ ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला दिया था। इन नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए छह महीने का अनिवार्य नोटिस पीरियड पूरा करना आवश्यक होता है।

विनेश फोगाट ने दिल्ली हाई कोर्ट में डब्ल्यूएफआई के आदेश को चुनौती दी। मगर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में हिस्सा लेने से जुड़े मामले में तत्काल कोई राहत नहीं दी। बाद में विनेश ने एकल पीठ के आदेश को भी चुनौती दी।

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