जयशंकर बोले-वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में स्थिर शक्ति बनेगा ब्रिक्स
समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, जलवायु संकट और विकासशील देशों के हितों पर जोर
नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता, युद्ध, आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा संकट के बीच भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में दुनिया के उभरते देशों ने बहुपक्षीय सहयोग, शांति और स्थिरता को लेकर साझा रणनीति पर मंथन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात कर वैश्विक सहयोग और साझेदारी का संदेश दिया, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की उम्मीदें अब ब्रिक्स से जुड़ गई हैं और यह समूह दुनिया में ‘रचनात्मक और स्थिर करने वाली शक्ति’ की भूमिका निभाएगा।
भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ब्राजील, रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया समेत सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ में सभी विदेश मंत्रियों से संयुक्त मुलाकात की। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से रात्रिभोज का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया लगातार संघर्षों, आर्थिक दबाव, व्यापारिक तनाव, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे दौर में संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में हैं तथा हाल के संघर्षों ने बातचीत की आवश्यकता को और स्पष्ट किया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि ब्रिक्स केवल एक आर्थिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन और स्थिरता का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ प्रधानमंत्री मोदी के मानवता-प्रथम और जनकेंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरित है।
एस. जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि सतत विकास के लिए समानता और ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों’ के सिद्धांत को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति दुनिया की दिशा बदल रही है और इसका उपयोग सुशासन तथा समावेशी विकास के लिए किया जाना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर जोर देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए देशों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। स्ट्रेट आॅफ होर्मुज और लाल सागर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में बाधा या ऊर्जा ढांचे पर खतरा पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।
सम्मेलन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। शुक्रवार को सम्मेलन के दूसरे दिन ‘ब्रिक्स एट 20’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें वैश्विक शासन, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा की जाएगी।
एस. जयशंकर ने सभी प्रतिनिधिमंडलों को धन्यवाद देते हुए कहा कि जटिल और अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों के बीच लगातार संवाद और सहयोग पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की अध्यक्षता में यह मंच वैश्विक दक्षिण की आवाज को और अधिक प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने रखेगा।












