सौंफ की खेती: सौंफ एक ऐसा मसाला है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. इसका इस्तेमाल मसाले, माउथ फ्रेशनर, अचार, मिठाइयों और कई तरह की दवाइयों में किया जाता है. यही वजह है कि इसकी खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. अगर सही तरीके से खेती की जाए तो कम खर्च में अच्छी कमाई हो सकती है.
सौंफ की खेती के लिए ऐसी जमीन अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी न रुके. खेत तैयार करने से पहले उसकी अच्छी तरह जुताई कर लें. इसके बाद गोबर की खाद डाल दें ताकि फसल अच्छी हो सके. कोशिश करें कि अच्छी किस्म के बीज ही खरीदें.
समय पर पानी दें और फसल का ध्यान रखें.
सौंफ की बुआई ज्यादातर अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है. बीजों को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बोएं ताकि पौधों को फैलने की जगह मिल सके. जरूरत के हिसाब से पानी देते रहें लेकिन खेत में पानी जमा न होने दें. खेत में घास और दूसरे बेकार पौधे उगने लगें तो उन्हें समय पर हटा दें. इससे सौंफ के पौधों को पूरा पोषण मिलता है और वे अच्छी तरह बढ़ते हैं. जरूरत पड़ने पर खाद भी डाल सकते हैं.
कब करें फसल की कटाई?
अगर फसल में कीड़े या किसी तरह की बीमारी दिखे तो खेती की जानकारी रखने वाले लोगों या कृषि विभाग से सलाह लें. समय पर सही कदम उठाने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. जब सौंफ के दाने हल्के भूरे होने लगें तब उसकी कटाई कर लें. कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाकर सूखी जगह पर रखें. इससे सौंफ लंबे समय तक खराब नहीं होती और बेचने पर अच्छे दाम मिल सकते हैं. अगर किसान सही समय पर बुआई करें और फसल का समय-समय पर ध्यान रखें तो सौंफ की खेती से अच्छी कमाई की जा सकती है.












