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बस्ती। खाद्य विभाग की सैंपलिंग प्रक्रिया में कथित विसंगतियों और व्यापारियों के उत्पीड़न के विरोध में गुरुवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री को संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ग्रेड-2 को दिया गया। संगठन ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत हो रही कार्रवाई में पारदर्शिता लाने और व्यापारियों को राहत देने की मांग की है। जिला अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कहा कि सैंपलिंग के दौरान व्यापारी और निर्माता की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मंडल अध्यक्ष हरिमूर्ति सिंह ‘मनोज’ ने बताया कि ज्ञापन में मांग की गई है कि सैंपल भरते समय निर्माता को पार्टी बनाए जाने पर फार्म-5क तत्काल पंजीकृत डाक से भेजा जाए। साथ ही, नकली और डुप्लीकेट सामान की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केवल बिल प्रस्तुत करने की स्थिति में ही निर्माता को जिम्मेदार बनाया जाए। प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया और सुनीत पाण्डेय ने जांच रिपोर्ट निर्धारित 14 दिन के भीतर उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संगठन ने केंद्रीय प्रयोगशाला में पुनः जांच की प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता ‘बबलू’ ने कहा कि खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई केंद्रीय प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही होनी चाहिए। वहीं, जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने मांग की कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व न मिलने पर नमूनों को ‘असुरक्षित’ घोषित करने के बजाय ‘अधोमानक’ माना जाए। ज्ञापन में शमन व्यवस्था लागू करने, पूर्णकालिक न्याय निर्धारण अधिकारी नियुक्त करने, प्राइवेट लैब रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई रोकने और सर्वे सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई। इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और व्यापारी मौजूद रहे।
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बस्ती व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन:सैंपलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यापारियों को राहत की मांग
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