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कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में अभियान जारी, समझौतों के पालन पर जोर

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि ऊर्जा निगमों में औद्योगिक शांति, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु यह आवश्यक है कि श्रमिकों एवं कर्मचारियों के साथ हुए समझौतों का पालन सुनिश्चित किया जाय तथा कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार समस्याओं का समाधान संवाद और सहभागिता के माध्यम से निकाला जाए तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा, स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विकास नीतियों में श्रमिक एवं कर्मचारी हितों का संतुलित समावेश करते हुए सभी पक्षों के बीच लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप पारस्परिक सम्मान बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

इन्हीं सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि श्रम संगठनों के साथ हुए समझौतों का समय से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि ऊर्जा निगमों में सौहार्दपूर्ण वातावरण और औद्योगिक शांति कायम रह सके।

संघर्ष समिति ने विशेष रूप से कहा है कि माननीय ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में 3 दिसंबर 2022 तथा 19 मार्च 2023 को हुए समझौतों का पूर्ण पालन कराया जाए और बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए तथा बिजली कर्मियों पर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय।

साथ ही संघर्ष समिति ने मांग की है कि बिजली कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक एवं दमनात्मक कार्यवाहियां तत्काल बंद की जाएं। कर्मचारियों के विरुद्ध की गई अनुचित अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेकर विश्वास और संवाद का वातावरण बनाया जाए, जिससे कर्मचारी निर्भीक होकर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में अपना योगदान दे सकें।

संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र जैसे संवेदनशील एवं जनहित से जुड़े विभाग में टकराव नहीं बल्कि संवाद, सहयोग और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना ही प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में होगा।

उत्पीड़न के विरोध में चलाए जा रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज देवरिया एवं आजमगढ़ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की विरोध सभाएं आयोजित की गईं। सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों  जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, चंद्रभूषण उपाध्याय एवं मोहम्मद वसीम ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद कर संवाद और समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ना ही प्रदेशहित में है।

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