पीलीभीत तरुण मित्र उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने, महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने तथा नशे के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने को लेकर जिला प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ सक्रिय दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों और एन-कार्ड की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें अपराध नियंत्रण, मुकदमों की प्रगति और मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में प्रशासन की प्राथमिकता साफ दिखाई दी कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और महिलाओं, बच्चों तथा कमजोर वर्गों को समय पर न्याय मिल सके। साथ ही युवाओं को नशे से बचाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भी सख्त रणनीति तैयार की गई। महिला और बच्चों से जुड़े अपराधों पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने साफ निर्देश दिए कि पास्को एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, बलात्कार तथा महिला और बच्चों से जुड़े गंभीर अपराधों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने अभियोजन अधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि मुकदमों की पैरवी प्रभावी ढंग से की जाए ताकि दोषियों को समय पर सजा मिल सके और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों में लंबित मामलों की लगातार मॉनिटरिंग की जाए और जिन मामलों में कार्रवाई धीमी है, उनमें तेजी लाई जाए। अभियोजन कार्यों की गहन समीक्षा, हर स्तर पर मांगी रिपोर्ट बैठक में शासकीय अधिवक्तावार अभियोजन वादों की स्थिति, जमानत प्रार्थना पत्रों के निस्तारण, दोषमुक्त हुए मामलों में दायर अपीलों, समन और वारंट की तामीला, गवाहों की उपस्थिति तथा सत्र न्यायालय में स्वीकृत और अस्वीकृत जमानतों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं में समन और वारंट की तामीला समय से सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों को कानूनी प्रक्रिया का लाभ लेकर बचने का अवसर न मिले। उन्होंने गवाहों की सुरक्षा और उनकी समय पर उपस्थिति को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि मजबूत गवाही ही अपराधियों को सजा दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। बैठक के दौरान महिला अपराधों में हुई कार्रवाई और दोषियों को दिलाई गई सजाओं की जानकारी भी जिलाधिकारी को दी गई। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन का उद्देश्य केवल मुकदमा दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षा का भरोसा कायम करना है। सीमावर्ती इलाकों पर खास नजर एन-कार्ड के अंतर्गत बीते महीने में किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में पुलिस, आबकारी विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सूचना तंत्र को मजबूत बनाया जाए। विशेष रूप से सीमावर्ती गांवों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए ताकि बाहर से आने वाले अवैध मादक पदार्थों की तस्करी को रोका जा सके।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाएं।
खेतों के किनारे मिलने वाले भांग के पौधों को नष्ट करने के निर्देश बैठक में जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि जनपद में खेतों के आसपास या अन्य स्थानों पर अवैध रूप से भांग के पौधे पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल नष्ट कराया जाए।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों की पहचान कर नियमित जांच अभियान चलाए जाएं। प्रशासन की कोशिश है कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध खेती या नशे से जुड़ी गतिविधियों को जड़ से खत्म किया जाए। जिलाधिकारी ने औषधि निरीक्षक को निर्देश दिए कि मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच की जाए। यदि किसी दुकान पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री या बिना अनुमति के दवाएं पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कई बार नशीली दवाओं का गलत इस्तेमाल युवाओं को नशे की ओर धकेल देता है, इसलिए इस पर प्रभावी नियंत्रण बेहद जरूरी है।
जिला आबकारी अधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि नशे के खिलाफ विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह का मानना है कि केवल कार्रवाई से ही नहीं, बल्कि जागरूकता से भी नशे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। प्रशासन की सक्रियता से जनता में बढ़ेगा भरोसा
पीलीभीत प्रशासन की इस सक्रियता को कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अपराधियों पर सख्ती और नशे के खिलाफ अभियान से आम लोगों में भरोसा बढ़ेगा । जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने बैठक के माध्यम से साफ संकेत दिया कि जनपद में अपराध, महिला उत्पीड़न और नशे के कारोबार के खिलाफ प्रशासन पूरी सख्ती के साथ काम करेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिला आबकारी अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, अधिवक्ता तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।












