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जनसंख्या घटने के डर से ‘बेबी बोनस’ पर उतरी सरकार, घटती जन्मदर को लेकर चिंतित

  • घटती जन्मदर रोकने को तीसरे बच्चे पर 30 हजार, चौथे पर 40 हजार प्रोत्साहन की घोषणा
  • बुजुर्ग आबादी बढ़ने और युवाओं की कमी को लेकर सरकार चिंतित
  • ज्यादा बच्चे बोझ नहीं, भविष्य की ताकत हैं : एन. चंद्रबाबू नायडू 

नई दिल्ली। कभी देश में बढ़ती आबादी सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। दक्षिण भारत के कई राज्यों की तरह आंध्र प्रदेश भी घटती जन्मदर की चुनौती से जूझ रहा है। यही वजह है कि अब सरकार लोगों से कम नहीं, बल्कि ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील कर रही है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तीसरे बच्चे पर 30 हजार और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने की घोषणा कर देश में जनसंख्या नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बीते दिनों श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नापेटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नायडू ने साफ कहा कि अगर जन्मदर इसी तरह गिरती रही तो आने वाले वर्षों में राज्य को गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि आबादी केवल संख्या नहीं, बल्कि भविष्य की कार्यशक्ति भी होती है।दरअसल दक्षिण भारत के कई राज्यों में प्रजनन दर तेजी से नीचे आई है।

बेहतर शिक्षा, शहरीकरण, बढ़ती जीवन लागत और छोटे परिवार की सोच ने जन्मदर को प्रभावित किया है। आंध्र प्रदेश सरकार को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में बुजुर्ग आबादी बढ़ेगी और कामकाजी युवाओं की संख्या घट जाएगी। इसका सीधा असर उद्योग, कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि सरकार अब ‘जनसंख्या नियंत्रण’ की जगह ‘जनसंख्या संतुलन’ की बात कर रही है। पहले जहां दो बच्चों के आदर्श परिवार का संदेश दिया जाता था, वहीं अब ज्यादा बच्चों वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की तैयारी हो रही है। मार्च 2025 में दूसरे बच्चे पर प्रोत्साहन की चर्चा हुई थी, लेकिन अब सरकार ने इसे तीसरे और चौथे बच्चे तक बढ़ा दिया है। नायडू ने अपने भाषण में यह भी कहा कि समाज में बच्चों को बोझ मानने की सोच बढ़ी है, जबकि बच्चे भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और यूरोप के कई देश घटती आबादी से परेशान हैं और वहां भी सरकारें ‘बेबी बोनस’ जैसी योजनाएं चला रही हैं।

फिलहाल आंध्र प्रदेश का यह फैसला देश में बदलती जनसंख्या राजनीति का नया संकेत माना जा रहा है। कभी आबादी घटाने की मुहिम चलाने वाला भारत अब कुछ राज्यों में बढ़ती उम्र और घटती युवा आबादी की चिंता से जूझता दिखाई दे रहा है।

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