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मेसर्स रहमान ट्रेडर्स को करोड़ों के भुगतानों पर सवाल:VIDEO में कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका निभाता दिखा फर्म संचालक, 4 घंटे बाद हटे थे BDO


ब्लॉक कार्यालय में बैठा मिला करोड़ों भुगतान पाने वाली फर्म का संचालक: 4 पंचायतों से 21 लाख मिले, BDO हटे तो बढ़े सवाल भास्कर की खबर के 4 घंटे बाद हुई कार्रवाई; सरकारी कंप्यूटर चलाते वीडियो वायरल, सफाईकर्मी भी ब्लॉक कार्यालय में मिला सिद्धार्थनगर | विकासखंड बर्डपुर में पंचायत व्यवस्था, वित्तीय लेनदेन और सरकारी कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति सरकारी कार्यालय के कंप्यूटर पर काम करता दिखाई दे रहा है। जांच में पता चला कि यह व्यक्ति मेसर्स रहमान ट्रेडर्स नामक फर्म का संचालक है, जिसे ग्राम पंचायतों से लाखों रुपए का भुगतान किया गया है। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब दैनिक भास्कर द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के महज चार घंटे बाद ही खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को हटा दिया गया। मामले की प्रमुख बातें- सरकारी कंप्यूटर पर काम करता मिला रहमान मामला एडीओ पंचायत कार्यालय से जुड़ा है, जहां रहमान नामक व्यक्ति सरकारी कंप्यूटर सिस्टम पर बैठकर काम करता दिखाई दिया। वीडियो में वह कार्यालय के कंप्यूटर पर कार्य करते हुए कैमरे में कैद हुआ। स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान किसी सरकारी या संविदा कर्मचारी के रूप में नहीं है। दैनिक भास्कर ने 18 जून को इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में सवाल उठाया गया था कि एक गैर-सरकारी व्यक्ति किस अधिकार से सरकारी कार्यालय में बैठकर कंप्यूटर संचालन और अन्य कार्यालयी कार्य कर रहा है। खबर सामने आने के बाद पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। जांच में सामने आया फर्म से भुगतान का कनेक्शन भास्कर की पड़ताल में पता चला कि कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका निभा रहा रहमान, मेसर्स रहमान ट्रेडर्स नामक फर्म का संचालक है। उपलब्ध भुगतान अभिलेखों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27 तक केवल चार ग्राम पंचायतों—बगही, बजहा, बरगदी और अगया—में ही इस फर्म को 21 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा केवल चार ग्राम पंचायतों का है, जबकि विकासखंड बर्डपुर में कुल 35 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि सभी पंचायतों के भुगतान का ब्योरा सामने आया तो राशि करोड़ों रुपए तक पहुंच सकती है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। सबसे बड़ा सवाल: भुगतान पाने वाली फर्म का संचालक कार्यालय में क्यों था? मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति की फर्म पंचायतों से बड़े पैमाने पर भुगतान प्राप्त कर रही हो, वही व्यक्ति सरकारी कार्यालय में बैठकर कंप्यूटर संचालन क्यों कर रहा था। उसकी भूमिका क्या थी? क्या उसे किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अधिकृत किया गया था या वह बिना किसी वैधानिक आदेश के कार्यालयी व्यवस्था का हिस्सा बना हुआ था? यदि वह सरकारी कर्मचारी नहीं था तो उसे सरकारी कंप्यूटर, अभिलेखों और कार्यालय के अन्य संवेदनशील दस्तावेजों तक पहुंच कैसे मिली? यह सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में है। सफाईकर्मी भी मिला ब्लॉक कार्यालय में मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सिंहोरवा बुजुर्ग ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मचारी फूलचंद ब्लॉक कार्यालय में कार्यरत पाया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गांव में तैनात सफाईकर्मी ब्लॉक कार्यालय में ड्यूटी कर रहा है तो ग्राम पंचायत की सफाई व्यवस्था कौन संभाल रहा है। इस तथ्य ने भी पंचायत व्यवस्था और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। खबर के 4 घंटे बाद हटे बीडीओ दैनिक भास्कर द्वारा 18 जून को खबर प्रकाशित किए जाने के महज चार घंटे बाद ही बर्डपुर के खंड विकास अधिकारी ओमप्रकाश यादव को उनके पद से हटाकर जिला विकास अधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। उनकी जगह अजय प्रताप को नया खंड विकास अधिकारी नियुक्त किया गया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे नियमित प्रशासनिक कार्रवाई बताया, लेकिन जिस दिन ब्लॉक कार्यालय की कार्यप्रणाली, पंचायत भुगतानों और बाहरी व्यक्ति की सक्रिय मौजूदगी को लेकर सवाल उठे, उसी दिन कुछ घंटों के भीतर हुई कार्रवाई ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। अब जांच के घेरे में भुगतान प्रक्रिया बर्डपुर विकासखंड में अब सबसे बड़ा सवाल मेसर्स रहमान ट्रेडर्स को हुए भुगतानों को लेकर है। आखिर किन कार्यों के लिए भुगतान किए गए? खरीद प्रक्रिया में क्या वित्तीय नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया? भुगतान किस स्तर से स्वीकृत हुए? और जिस व्यक्ति की फर्म को भुगतान मिल रहे थे, वह सरकारी कार्यालय में किस हैसियत से सक्रिय था? चार ग्राम पंचायतों में 21 लाख रुपए से अधिक के भुगतान का मामला सामने आने के बाद अब बाकी पंचायतों के अभिलेख भी जांच और चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। संरक्षण किसका था, जांच क्या बताएगी? वीडियो से शुरू हुआ यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौजूदगी तक सीमित नहीं रह गया है। मामला पंचायतों में हुए भुगतानों, सरकारी कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका, कर्मचारियों की तैनाती और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेसर्स रहमान ट्रेडर्स को हुए भुगतानों और सरकारी कार्यालय में उसकी सक्रिय मौजूदगी के पीछे आखिर किसका संरक्षण था? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तस्वीर जनता के सामने लाई जाएगी या यह मामला भी प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।

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