सिद्धार्थनगर के बढ़नी क्षेत्र में मानसूनी बारिश की कमी और नहरों में पानी न पहुंचने के कारण धान की खेती संकट में है। बाणगंगा और सरयू मुख नहरों सहित सभी माइनर नहरें सूखी पड़ी हैं, जिससे किसानों को धान की नर्सरी बचाने के लिए निजी सिंचाई संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई व्यवस्था मानी जाने वाली बाणगंगा और सरयू मुख नहरों में पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद है। इससे खेत सूखे पड़े हैं और किसानों की रोपाई के समय नहरों से सिंचाई की उम्मीदें टूट गई हैं। धान की नर्सरी तैयार होने के बाद उसे बचाने के लिए किसान रोजाना सिंचाई कर रहे हैं। नहरों से पानी न मिलने के कारण उन्हें बोरिंग और पंपसेट का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे डीजल और बिजली का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे खेती की लागत में वृद्धि हुई है। भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र से गुजरने वाली सरयू नहर परियोजना से जुड़े किसान हर सीजन में नहरों पर निर्भर रहते हैं। इस बार बढ़नी क्षेत्र से लेकर बाणगंगा तक के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों के किसानों को अपेक्षित सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि पहले नहर के पानी से कम लागत में सिंचाई हो जाती थी, लेकिन अब निजी संसाधनों के उपयोग से खेती महंगी होती जा रही है। लगातार सिंचाई करने से उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं। किसान सन्नी सिंह, रोहित कुमार, अताउर्रहमान, अब्दुल सबूर और सिद्दीक सहित अन्य किसानों ने सिंचाई विभाग से जल्द नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई सुविधा मिलने से धान की फसल को बचाया जा सकता है और किसानों को राहत मिलेगी।
सिद्धार्थनगर में सूखी नहरें, धान की नर्सरी संकट में:किसान पंपसेट पर निर्भर, खेती की लागत बढ़ने से चिंता
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