लखनऊ । यायावर रंगमंडल और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार,नई दिल्ली के सहयोग से दो दिवसीय उल्लास बाल पर्व का आयोजन सोमवार और मंगलवार को कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली ऑडिटोरियम में किया जा रहा है। यह एक बड़ी उपलब्धि है कि बाल मनोविज्ञान का अनुसरण करते हुए पूरी तरह से बाल रंगकर्म को समर्पित “ उल्लास बाल पर्व ” का यह 32वां आयोजन है। “यायावर रंगमंडल” द्वारा आयोजित “उल्लास बाल पर्व” पिछले 32 वर्षों से बच्चों के व्यक्तित्व विकास, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और कलात्मक दृष्टि को निखारने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इस पर्व की पहली संध्या, सोमवार को इंदिरा नगर स्थित के.के. अकादमी, के बच्चों द्वारा तैयार नाटक “गुपी गाइन बाघा बाइन” का प्रभावी मंचन पुनीत मित्तल के निर्देशन में किया गया। सत्यजीत रे के प्रसिद्ध रूपांतरण से प्रेरित इसकी मूल कथा उपेन्द्र किशोर रे चौधरी की है जबकि इसका हिन्दी नाट्य रूपांतरण आद्या घोषाल ने किया है वहीं इसकी अवधारणा लक्ष्मी कौल की है। इस नाटक ने संदेश दिया कि संगीत, प्रेम और भाईचारा ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हैं।
संगीत,प्रेम और भाईचारा ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत
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