HomeHealth & Fitnessओजोन प्रदूषण दिल और फेफड़ों को पहुंचा रहा है नुकसान

ओजोन प्रदूषण दिल और फेफड़ों को पहुंचा रहा है नुकसान

ओजोन प्रदूषण : हर साल दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण से परेशान रहते हैं। दिवाली के बाद से प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। लेकिन मार्च अप्रैल आते ही इसका असर कम होने लगता है। लोग ये सोचकर खुश हो जाते हैं कि प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल चुकी है। लेकिन अब गर्मी में ओजोन प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगा है। ये प्रदूषण भले ही धुंध के रूप में दिखाई न देता हो, लेकिन फेफड़ों पर इसका घातक असर होता है। बहुत सारे लोग इस प्रदूषण और उससे जुड़े खतरे के बार में जानते भी नहीं हैं। आइये जानते हैं ओजोन प्रदूषण कितना खतरनाक है और इससे किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट आई है, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर ओजोन प्रदूषण का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है। ओजोन प्रदूषण सेहत के अलावा खेती और फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। 

क्या है ओजोन प्रदूषण
डॉक्टर हेमंत गोयल (सीनियर डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, एलर्जी और स्लीप मेडिसिन, यथार्थ हॉस्पिटल, फरीदाबाद) ने बताया कि ओजोन प्रदूषण बेहद खतरनाक वायु प्रदूषण है, लेकिन ये किसी धुए, फैक्ट्री या वाहन से नहीं निकलता, बल्कि हवा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) के तेज धूप के संपर्क में आने और ज्यादा तापमान होने पर बनने वाली गैस है। जब गर्मी में दिल्ली-एनसीआर का तापमान बढ़ता है, तेज धूप होती है तो वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक ओजोन के लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं। जिसके कारण गर्मी में ओजोन प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन जाता है।

ओजोन प्रदूषण से क्या है खतरा
ओजोन प्रदूषण हमारे श्वसन तंत्र यानि फेफड़ों के लिए सबसे घातक है। इतना ही नहीं इससे आंखों में जलन, गले में खराश, लंबी खांसी, सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न जैसी महसूस हो सकती हैं। ओजोन प्रदूषण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के रोगियों के लिए गंभीर हो सकता है। इसका असर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों पर ज्यादा हो सकता है। इन लोगों को अधिक गर्मी के दिनों में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खुले में काम करने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों के फेफड़े प्रदूषित हवा के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

फेफड़ों और दिल के लिए है खतरनाक
लंबे समय तक ओजोन प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इससे सांस से जुड़े इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। कुछ रिसर्च में कहा गया है कि लगातार बढ़े हुए ओजोन प्रदूषण में रहने से दिल की बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। 

इस समय रहता है सबसे ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब ओजोन का स्तर सबसे अधिक होता है, तब बिना जरूरत के घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, मास्क पहनना, भारी व्यायाम खुले में न करें और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर नजर रखना भी जरूरी है। पर्सनल वाहनों का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाएं और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को कम करना ओजोन प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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