जनपद सिद्धार्थनगर में करोड़ों रुपये के कथित पंचायत घोटाले की जांच पांच दिन बाद भी शुरू नहीं हो पाई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नौगढ़ और शोहरतगढ़ विकासखंड की छह ग्राम पंचायतों—रामगढ़, हरदासपुर, टेड़िया, सेमरियाव, रसूलपुर और रामपुर—में वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच फर्जी भुगतान, बिल-वाउचर में गड़बड़ी और बिना वास्तविक कार्य के धन निकासी के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता ने SK Traders और RK Traders के माध्यम से बिना टेंडर फर्जी बिलों से लूट की आशंका जताई है। शिकायतकर्ता अंकित सिंह ने 29 अप्रैल को नोटरी एफिडेविट के साथ विस्तृत साक्ष्य जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को सौंपे थे। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) को जांच के निर्देश दिए थे और मौके पर भौतिक सत्यापन के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने का आदेश भी दिया था। हालांकि, जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पांच दिन बीत जाने पर भी न तो कोई जांच टीम गठित की गई है और न ही प्रारंभिक सत्यापन शुरू हुआ है। इस देरी ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर किया है। आरोपों के अनुसार, ग्राम पंचायत रामगढ़ में स्ट्रीट लाइट के नाम पर प्रति लाइट ₹3,871 का भुगतान दिखाया गया है, जबकि बाजार में इसकी दर ₹600 से ₹1200 बताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, कई महीनों में विभिन्न मदों में लाखों रुपये के भुगतान को भी संदिग्ध बताया गया है। हरदासपुर ग्राम पंचायत में 50 स्ट्रीट लाइट के लिए ₹1.77 लाख से अधिक का भुगतान दर्शाया गया है। जनवरी से अगस्त के बीच अन्य मदों में ₹10 लाख से अधिक की धनराशि के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं। टेड़िया ग्राम पंचायत में ईंट, सफाई और स्ट्रीट लाइट के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद मौके पर कोई कार्य नहीं मिला है। मार्च में पोर्टल पर ₹20 लाख से अधिक की राशि दर्ज होने के बावजूद संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं।
सिद्धार्थनगर में करोड़ों का पंचायत घोटाला ‘दबाने’ के आरोप:5 दिन बाद भी जांच टीम गठित नहीं, बिना टेंडर फर्जी बिलों से लूट की आशंका
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