नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब इस अधिकार को सर्वोच्च संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में कहा कि संविधान सभा में भी मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने पर गंभीर चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और बाबू जगजीवन राम इसके पक्ष में थे, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल और सी. राजगोपालाचारी सहित कुछ सदस्यों का मत था कि संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान पर्याप्त होगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था की गई है, लेकिन पिछले सात दशकों से यह बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार है या मौलिक अधिकार। उन्होंने मार्च 2023 के अनुप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की असहमति टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया गया था।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड, वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे की जानकारी पाने के अधिकार को संवैधानिक संरक्षण दे चुका है। साथ ही मतपत्र की गोपनीयता और नोटा के अधिकार को भी मान्यता दी गई है।
जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने से मतदाता अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी और चुनावी प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी भी मजबूत होगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।












