सिद्धार्थनगर में भीषण गर्मी और लू के कारण स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। जिले में उल्टी-दस्त और वायरल संक्रमण के मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। माधव प्रसाद तिवारी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, लू और गर्मी से शरीर में पानी की कमी और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ गई है। पहले जहां रोजाना 600 से 700 मरीज आते थे, अब यह संख्या लगातार बढ़कर अस्पताल व्यवस्था पर दबाव डाल रही है। अधिकांश मरीज उल्टी, दस्त, बुखार, चक्कर, कमजोरी और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। तेज धूप और लू के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो जाता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही गर्मी में भोजन जल्दी खराब होने से फूड पॉइजनिंग के मामले भी बढ़ रहे हैं। 42 डिग्री पार तापमान, बारिश से मिली राहत
बीते दिनों जिले का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि हाल ही में हुई बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट आई है, जिससे लोगों को राहत मिली है, लेकिन उमस बढ़ने से संक्रमण का खतरा अभी भी बरकरार है। अस्पताल अलर्ट, व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त बेड, दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की सलाह- सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोगों से अपील की है कि दोपहर के समय अनावश्यक बाहर न निकलें और बाहर निकलते समय सिर ढककर रहें। हल्के सूती कपड़े पहनें और पानी, ओआरएस, नींबू पानी जैसे तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन करें। खुले में बिकने वाले भोजन से बचने और साफ-सफाई बनाए रखने की भी सलाह दी गई है। लक्षण नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज जरूरी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उल्टी, दस्त, तेज बुखार, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। देरी करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी मौसम में खतरा पूरी तरह टला नहीं है, इसलिए सतर्कता और सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
गर्मी और लू से अस्पतालों में मरीजों की भीड़:सिद्धार्थनगर में उल्टी-दस्त और वायरल संक्रमण के मामले बढ़े
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