मुडिला शिवदत्त में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के पंचम दिवस पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। अयोध्या धाम के कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कथा सुनाई, जिसमें श्रद्धालु डीजे की धुन पर जमकर झूमे और जय श्रीकृष्ण के नारों से पंडाल भक्तिमय हो गया। कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने भक्त प्रहलाद चरित्र और गज-ग्राह की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। कंस के अत्याचारों से संत, ब्राह्मण, गौ और समस्त पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रही थी, जिसके बाद देवताओं ने भगवान से अवतार लेने की प्रार्थना की। शास्त्री जी ने भगवान के जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी मैया के गर्भ से मथुरा के कारागार में जन्म लिया। वासुदेव जी रातों-रात बालकृष्ण को गोकुल पहुंचाकर वहां से एक कन्या को ले आए। कंस को जब अपने आठवें काल के जन्म का पता चला और उसने कन्या को मारने का प्रयास किया, तो वह कन्या अष्टभुजी देवी के रूप में आकाश में अंतर्ध्यान हो गई। देवी ने कंस से कहा कि उसे मारने वाला पैदा हो चुका है। महाराज जी ने बताया कि भगवान के गोकुल पहुंचने पर नंद और यशोदा के घर आनंद छा गया। गोपियां माखन-मिश्री बांटकर बधाई देने लगीं और ग्वाल-बाल नाचने लगे। धरती पर सुख और आनंद बढ़ गया। सभी ने बड़े हर्षोल्लास के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया, ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने डीजे की धुन पर खूब नृत्य किया। जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के नारों से पूरा पंडाल भक्तिमय बना रहा। इससे पहले, यज्ञाचार्य शशिकांत शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना और मंगल आरती संपन्न कराई। इस कथा के मुख्य यजमान राज मंगल मिश्र और आयोजक कृष्णा मिश्रा रहे। इस अवसर पर पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी, बलराम मिश्रा, कन्हैया विश्वकर्मा, उषा देवी, सहजराम यादव, राम कृपाल चौधरी, उदयभान विश्वकर्मा, दिनेश गुप्ता, कमल प्रसाद गुप्ता और राधेश्याम मिश्रा सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर डीजे पर झूमे भक्त:मुडिला शिवदत्त में कथावाचक ने सुनाई कथा, जयकारों से गूंजा पंडाल
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