लखनऊ। कैसरबाग इलाके में मेडिकल छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच बुधवार को विवाद हो गया। गुरुवार को थाने से लेकर डीसीपी कार्यालय तक हंगामा हुआ। एमबीबीएस छात्र ने स्थानीय लोगों पर कमरे में घुसकर मारपीट और जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। दूसरे पक्ष का कहना है कि छात्र देर रात पार्टी के दौरान गाली-गलौज कर रहे थे, विरोध करने पर विवाद हुआ।
लखीमपुर खीरी निवासी निकेत कुमार राज केजीएमयू में एमबीबीएस अंतिम साल का छात्र है। उसने कैसरबाग थाने में दी तहरीर में बताया कि उसका भाई अंशू खंदारी बाजार स्थित किराए के कमरे में रहकर नीट की तैयारी करता है। आरोप है कि बुधवार रात करीब 12:30 बजे स्थानीय निवासी अब्दुल्ला, मुजीब, फैसल, यूसुफ समेत 10-15 लोग कमरे में घुस आए। नाम पूछने के बाद अंशू की पिटाई शुरू कर दी। सूचना मिलने पर निकेत अपने साथियों उदित और मान कश्यप के साथ मौके पर पहुंचा।
आरोप है कि हमलावरों ने ईंट और धारदार हथियार से हमला कर दिया। मारपीट में तीनों छात्र घायल हो गए। किसी तरह जान बचाकर वहां से भागे। पुलिस ने निकेत की तहरीर पर चार नामजद समेत 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत आठ धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में ले ली है। फुटेज में कई लोग छात्रों के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस रात में ही दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए थाने ले आई। गुरुवार दोपहर दूसरे पक्ष के लोग महिलाओं और वकीलों के साथ कैसरबाग थाने पहुंचे।
उन्होंने मेडिकल छात्रों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इस दौरान पुलिस और दूसरे पक्ष के लोगों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक होती रही। इसी बीच मेडिकल छात्र भी थाने पहुंच गए। छात्रों को देखकर दूसरे पक्ष के लोग भड़क गए और गिरफ्तारी की मांग करने लगे। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने छात्रों को थाने से बाहर कर दिया। आरोप है कि बाहर निकलते ही दूसरे पक्ष के लोगों ने छात्रों को दौड़ाकर पकड़ लिया और हाथापाई शुरू कर दी।
पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग कराया। विवाद बढ़ने पर मेडिकल छात्र डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित के कार्यालय पहुंच गए और पूरी घटना की जानकारी दी। कुछ देर बाद दूसरे पक्ष के वकील और समर्थक भी वहां पहुंच गए। दोनों पक्ष आमने-सामने आने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को देखते हुए डीसीपी पश्चिम ने खुद मोर्चा संभाला। तीन थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुलानी पड़ी। काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद मामला शांत कराया गया। दूसरे पक्ष के लोग छात्रों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे।












