सिद्धार्थनगर के जोगिया क्षेत्र के नगरा ग्राम पंचायत में ग्रामीण पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि लगातार ट्यूबवेल चलने के कारण उनके निजी घरेलू हैंडपंप या तो सूख गए हैं या उनसे पानी निकालने में काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि हैंडपंप से थोड़ी मात्रा में पानी निकालने में भी काफी श्रम और समय लग रहा है। छोटे बच्चे और महिलाएं नल नहीं चला पा रही हैं, जिससे लोगों को काफी असुविधा हो रही है। उनका कहना है कि इस समय खेतों में फसलें भी नहीं हैं, फिर भी ट्यूबवेल चलाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्यूबवेल चलाने का उद्देश्य बगल में स्थित तालाब को एक पट्टाधारक द्वारा भरना है। वे सवाल उठा रहे हैं कि सिंचाई के लिए बने ट्यूबवेल का उपयोग तालाब भरने के लिए क्यों किया जा रहा है, जबकि जल का व्यावसायिक उपयोग वर्जित है। इस संबंध में पट्टाधारक विश्वास दास से दैनिक भास्कर टीम ने बात की। उन्होंने बताया कि तालाब सूख रहा था, जिससे गांव में मवेशियों के लिए पानी पीने की समस्या उत्पन्न हो जाती। ऐसे में थोड़ी देर ट्यूबवेल चलाकर तालाब में पानी भरा जा रहा था। ट्यूबवेल ऑपरेटर सुभाष ने जानकारी दी कि उन्हें ट्यूबवेल चलने की सूचना मिली थी, जिसे तत्काल बंद करवा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्यूबवेल का प्रयोग केवल खेतों की सिंचाई के लिए है और इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। इस मौके पर नरसिंह गुप्ता, पवन, शिवरतन, विजय, श्याम सुंदर, सुखराम और कन्हैया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
नगरा गांव में पेयजल संकट, ट्यूबवेल चलाने का आरोप:ग्रामीण बोले- पट्टाधारक तालाब भरने के लिए चला रहा ट्यूबवेल
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