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गलवान के 6 साल बाद भी चीन से बढ़ा आयात? खरगे ने सरकार से मांगा जवाब


कांग्रेस ने व्यापार घाटे, आयात और अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर गलवान संघर्ष के बाद चीन के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि छह वर्ष बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था के कई रणनीतिक क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है, जिससे राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में खरगे ने कहा कि गलवान में 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को “क्लीन चिट” दे दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन सरकार भारत के हितों की रक्षा करने में विफल रही।
खरगे ने कहा कि वर्ष 2025-26 तक चीन से भारत का आयात गलवान के बाद 101.81 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि व्यापार घाटा बढ़कर 112.1 अरब डॉलर पहुंच गया। उनके अनुसार, भारत के एंटीबायोटिक आयात का 86 प्रतिशत तथा एपीआई, बल्क ड्रग और ड्रग इंटरमीडिएट का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है।
उन्होंने दावा किया कि इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में 66 प्रतिशत कंपोनेंट और करीब 75 प्रतिशत लिथियम-आयन बैटरियां चीन से आयात होती हैं। इसके अलावा, 93 प्रतिशत परमानेंट मैग्नेट और 99 प्रतिशत से अधिक अनडिफ्यूज्ड सिलिकॉन वेफर भी चीन से ही मंगाए गए। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं में बोली लगाने की अनुमति देकर चीन की मौजूदगी और बढ़ा दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि नागरिक समाज की रिपोर्टों के अनुसार चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में अतिक्रमण जारी रखे हुए है। उन्होंने आॅपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की गतिविधियों में चीन की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर देश को जवाब देना चाहिए।

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