कांग्रेस (Congress) सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने लोकसभा में परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना देश के लिए नुकसानदेह हो सकता है। थरूर ने कहा कि इस तरह के फैसले बिना पर्याप्त तैयारी के लिए गए तो इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
परिसीमन बिल की नोटबंदी से तुलना
अपने बयान में थरूर ने 2016 की नोटबंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वह फैसला अचानक लिया गया था और देश को उसके परिणाम भुगतने पड़े, उसी तरह परिसीमन भी ‘राजनीतिक नोटबंदी’ बन सकता है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि इस प्रक्रिया को सोच-समझकर और पर्याप्त तैयारी के साथ ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण को लेकर आपत्ति
लोकसभा में चर्चा के दौरान थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर भी कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि सरकार इसे ‘नारी शक्ति’ के नाम पर पेश कर रही है, लेकिन इसे जटिल प्रक्रियाओं से बांध दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महत्वपूर्ण और नैतिक मुद्दे को अनावश्यक रूप से क्यों उलझाया जा रहा है।
तुरंत लागू करने की मांग
थरूर का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा पूरी तरह तैयार है और इसे मौजूदा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसे परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ना महिलाओं की
उम्मीदों को टालने जैसा है।
राज्यों के बीच असंतुलन की चिंता
परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चिंता जताते हुए थरूर ने कहा कि इससे राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है, वे नुकसान में रह सकते हैं, जबकि अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील विषय पर व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
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