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बस्ती में मनोरमा, कुआनो और रामरेखा नदियों के बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमणि पांडे ‘सुदामा’ जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में पिछले पांच दिनों से भूख-हड़ताल पर हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है, जिससे जन आक्रोश बढ़ रहा है। अवकाश के दिन भी धरना स्थल पर गतिविधियां जारी रहीं। आंदोलनकारियों ने नायब तहसीलदार, बस्ती सदर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें नदियों की सफाई और पुनर्जीवन के लिए समयबद्ध एवं पारदर्शी कार्ययोजना तत्काल घोषित करने की मांग की गई। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण, गाद निकासी और जल प्रवाह बहाली के लिए विभागवार जवाबदेही तय करने तथा पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करने की भी मांग की। चंद्रमणि पांडे ‘सुदामा’ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही लिखित रूप में ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत कर भूख-हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास नहीं किया गया, तो सोमवार से आंदोलन और व्यापक तथा उग्र रूप धारण करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। धरने को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे। इनमें देवशरण शुक्ल, दिग्विजय नाथ पांडे, राजीव पांडे, महेंद्र प्रताप सिंह, राहुल विश्वकर्मा और नरेंद्र देव उपाध्याय प्रमुख रूप से शामिल थे। आंदोलनकारियों का कहना है कि दूषित नदियां अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और भविष्य के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी हैं।
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नदी प्रदूषण: सामाजिक कार्यकर्ता की भूख-हड़ताल 5वें दिन भी जारी:प्रशासन को चेतावनी, ठोस कार्ययोजना न देने पर आंदोलन होगा उग्र
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