HomeHealth & Fitnessकेजीएमयू: डिजिटल सेवा से होगा असाध्य रोगों का इलाज

केजीएमयू: डिजिटल सेवा से होगा असाध्य रोगों का इलाज

लखनऊ। केजीएमयू में कुछ समय पहले ऐसा मामला आया था,यहां मरीजों के इलाज की राशि उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित की बात सामने आई थी।लेकिन अब केजीएमयू प्रशासन ने असाध्य रोगों के इलाज के लिए एक बेहद सुरक्षित,पारदर्शी और पूर्णतः कैशलेस डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के भर्ती मरीजों के असाध्य रोगी का कार्ड बनने के बाद,उनके मुख्य चिकित्सक,डॉक्टर द्वारा इलाज में आने वाले संभावित खर्च का एक प्राक्कलन तैयार किया जाएगा। मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के उपरांत, इस इस्टीमेट के बराबर की राशि मरीज के अस्पताल रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़े खाते में ‘वर्चुअल मनी’ (वर्चुअल बैलेंस) के रूप में फीड कर दी जाएगी जो की हॉस्पिटल अकाउंट के अंतर्गत होगा। ये जानकारी डा कृष्ण कांत सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू ने दी है। उन्होंने बताया निजी खाते में लेनदेन नहीं किया जाता है कि किसी भी मरीज या तीमारदार के व्यक्तिगत बैंक खाते में कोई भी धनराशि ट्रांसफर नहीं की जाएगी।
काउंटर पर पारदर्शिता:
केजीएमयू के विभिन्न दवा वितरण केंद्रों एवं पैथोलॉजी/रेडियोलॉजी जांच काउंटरों पर मरीज के रजिस्ट्रेशन नंबर को सिस्टम में दर्ज करते ही उपलब्ध वर्चुअल मनी की स्थिति दिखाई देगी। इसी वर्चुअल बैलेंस से मरीज की दवाएं और जांचें नि शुल्क (डिजिटल एडजस्टमेंट के माध्यम से) की जाएंगी।
बैलेंस बढ़ाने की सुविधा:
यदि इलाज लंबा चलने के कारण आवंटित वर्चुअल मनी समाप्त हो जाती है, तो मरीज को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इलाज कर रहे डॉक्टर की रिक्वेस्ट/सिफारिश पर इस वर्चुअल मनी की सीमा को तत्काल बढ़ाया जा सकेगा। डा कृष्ण कांत सिंह ने बताया,केजीएमयू प्रशासन सभी मरीजों, तीमारदारों और आम जनमानस से अपील करता है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें। यह व्यवस्था मरीजों को दफ्तरों के चक्कर काटने और कैश के झंझट से बचने के लिए पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बनाई गई है।  

 
 
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