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बस्ती जिले में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे यह खतरे के निशान की ओर अग्रसर है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंध विहीन गांवों और कृषि भूमि पर कटान का खतरा मंडरा रहा है, जिससे ग्रामीणों में बाढ़ का डर सताने लगा है। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के जलकर्मी बलराम ने बताया कि मंगलवार को सरयू नदी का जलस्तर 92.400 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह खतरे के निशान 92.730 मीटर से मात्र 33 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि चेतावनी स्तर 91.730 मीटर से 67 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के पानी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। नदी की धारा तटबंध विहीन करीब आधा दर्जन गांवों को निशाना बना रही है। कटान के कारण आबादी और खेती योग्य जमीनें धीरे-धीरे नदी में समाहित हो रही हैं। अपस्ट्रीम में नदी के बढ़ने से जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर बढ़ने से विक्रमजोत के एलबी और बीडी तटबंधों के बीच बसे भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव के समीप चांदपुर, संदलपुर, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शम्भूपुर, लकड़ी, पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, माझा किता अव्वल सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों को बाढ़ का डर सता रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुपालकों के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। नदी बेतावा, भौसिया और पकड़ी संग्राम जैसे कटान प्रभावित गांवों में जमीनों और वनस्पतियों को अपनी धारा में बहा रही है। एलबी तटबंध के केशवपुर और रानीपुर कठवनियां के पास नदी तटबंध के ठोकरों पर दबाव बना रही है। बीडी तटबंध के एनएचआई पुल निर्माण स्थल पर भी पानी बढ़ने से बाढ़ खंड सुरक्षा व्यवस्था में जुटा हुआ है। बाढ़ खंड के एसडीओ बृजेश सोनी ने बताया कि जब तक नदी खतरे के निशान पर नहीं पहुंचती, तब तक तटबंध को कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि निगरानी तेज कर दी गई है और प्रत्येक संवेदनशील स्थान पर प्रतिदिन सुबह-शाम उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुसार निरीक्षण कर स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
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सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब:बस्ती में तटबंधों पर दबाव, ग्रामीणों को बाढ़ का डर
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