नगर के सैय्यद वाडा स्थित इमामबाड़ा नवाब साहब में मोहर्रम के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया। इसे मौलाना सैय्यद वारिस अली ने संबोधित किया। मौलाना वारिस अली ने करबला के मैदान में तीन दिन भूखे-प्यासे रहे हज़रत अली अकबर की शहादत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने चौदह सौ वर्ष पूर्व इराक के तत्कालीन शासक यज़ीद की सत्ता का समर्थन नहीं किया और उसके जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया। इमाम हुसैन मानवता की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। मौलाना ने इमाम हुसैन के अठारह वर्षीय बेटे अली अकबर की शहादत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि करबला के मैदान में यज़ीद की चालीस हज़ार की सेना उन पर टूट पड़ी और वे लड़ते हुए शहीद हो गए। जुल्म यहीं नहीं रुका, इमाम हुसैन के छह माह के बेटे को भी तीर चलाकर बेरहमी से शहीद कर दिया गया। मजलिस के बाद इमामबाड़े में हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम का अलम उठाया गया। सैय्यद अली असगर रिज़वी और मोहम्मद अब्बास रिज़वी ने अलम उठाया, जिसकी मजलिस में मौजूद लोगों ने ज़ियारत की। अंत में, जीशान रिजवी और नौशाद अली मन्नू ने नौहे पढ़े। इसके बाद ‘या हुसैन’ की सदाओं के साथ नौजवानों ने ज़ोरदार मातम किया। इस कार्यक्रम में सैय्यद कल्बे अब्बास, सगीर इमाम रिज़वी, अफसाल, मज़हर सईद, फिरोज, ज़िया और सैय्यद हसन अब्बास सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
बहराइच में मोहर्रम पर मजलिस का आयोजन:हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर किया मातम
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