गाजियाबाद। महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज होती जा रही है। बहुजन समाज पार्टी के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष मनोज कुमार जाटव ने इस बिल का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही इसे ‘देर से उठाया गया कदम’ बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।
मनोज जाटव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सिर्फ महिला आरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक सामाजिक न्याय मिल सके।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर असल मुद्दों से ध्यान भटकाकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 संसद से पारित होने के बावजूद अब तक लागू नहीं किया गया, क्योंकि इसमें परिसीमन और जनगणना जैसी शर्तें जोड़ दी गई हैं।
जाटव ने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास इच्छाशक्ति हो, तो बिना परिसीमन के भी इस कानून को लागू किया जा सकता है, लेकिन राजनीतिक लाभ के चलते इसे टाला जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संसद का विशेष सत्र बुलाने के पीछे असली मकसद महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
इस बयान के बाद महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत और गरमाने के आसार हैं, जहां एक ओर इसे ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके पीछे की मंशा पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।












