रिपोर्ट:ब्यूरो कार्यालय।
सिसवा बाजार (महराजगंज)। विकास कार्यों में पारदर्शिता के सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाते हुए सिसवा ब्लॉक की ग्राम सभा गोपाला में एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा विकास सामग्री की खरीदारी कागजों पर चल रही एक ऐसी दुकान से दिखाई गई है, जिसका धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं है। इस कथित फर्जी फर्म के खाते में सरकारी खजाने से लाखों रुपये की राशि भी हस्तांतरित कर दी गई है।
*31 जुलाई को हुआ 2.48 लाख से अधिक का भुगतान।*
प्राप्त विवरण के अनुसार, ग्राम सभा गोपाला में ‘पी.डब्ल्यू.डी. सड़क से प्रेमी के घर तक नाली निर्माण व इंटरलॉकिंग कार्य’ कराया गया था। इस कार्य के मद में सामग्री आपूर्ति के नाम पर ‘मेसर्स दिव्यांश एंटरप्राइजेस’ को बीते 31 जुलाई 2026 को 2,48,945 रुपये (दो लाख अड़तालीस हजार नौ सौ पैतालीस रुपये) का भुगतान जारी किया गया।
*जिम्मेदार मौन, सफाई कर्मी के बहानों से गहराया संदेह।*
जब इस संदर्भ में ग्राम प्रधान अम्बरीष पटेल से वार्ता की गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि “मुझे जानकारी नहीं है, पूछकर बताता हूँ।” हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
मामले की पड़ताल के लिए जब वाउचर पर अंकित मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने अपने छोटे बेटे विजय चौधरी से बात करने को कहा। जांच में पता चला कि विजय सिसवा ब्लॉक में ही सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। सफाई कर्मी विजय ने पूछे जाने पर कहा कि “हमारे भाई कचहरी में वकील हैं, उनसे बात कर लीजिए।” जब वकील का संपर्क नंबर मांगा गया तो “कोर्ट में होने के कारण बात न हो पाने” का बहाना बनाकर टालमटोल की गई। लगातार दिए जा रहे बहानों से मामले में गड़बड़ी का संदेह और पुख्ता हो गया।
*ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: रायपुर सिसवा बाजार में नहीं मिली दुकान।*
संदेह के आधार पर जब मीडिया टीम वाउचर पर दर्ज पते ‘रायपुर सिसवा बाजार’ पहुँची, तो वहां का दृश्य चौकाने वाला था। स्थानीय दुकानदारों व ग्रामीणों से ‘दिव्यांश एंटरप्राइजेस’ के बारे में पूछताछ की गई। एक स्थानीय व्यवसायी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “इस नाम की कोई भी दुकान इस चौराहे या आसपास के क्षेत्र में कभी संचालित ही नहीं हुई है।” धरातल पर पोल खुलने के बाद सफाई कर्मी ने फोन उठाना भी बंद कर दिया।
*एडीओ पंचायत ने कहा— नोटिस जारी, होगी जांच।*
इस संबंध में ए.डी.ओ. पंचायत बलिराम मौर्य ने बताया कि:
> “प्रकरण संज्ञान में है। एक पूर्व शिकायत के आधार पर उक्त दुकान के नाम से एक सप्ताह पूर्व नोटिस जारी किया गया है। जवाब न मिलने पर पुनः नोटिस जारी कर दुकान की स्थिति और अस्तित्व की विधिक जानकारी मांगी जाएगी।”
*ब्लाक प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल।*
अस्तित्व वाली फर्म से सामग्री आपूर्ति दिखाए जाने के बाद अब ब्लॉक प्रशासन से लेकर ग्राम पंचायत के कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।











