सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा बुजुर्ग स्थित कर्बला में मोहर्रम की चौथी तारीख पर मर्सिया मजलिस का आयोजन किया गया। यह मजलिस दस दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा थी। मजलिस को गाजीपुर से आए मौलाना उरुज अली ने संबोधित किया। मजलिस की शुरुआत शायरों ने अपने कलाम से की। हसन नसीराबादी, अम्मार हल्लौरी और जावेद हुसैन ने इमाम हुसैन की शान में शेर पेश किए। मौलाना उरुज अली ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन ने अपना पूरा जीवन अल्लाह के जिक्र में बिताया। उन्होंने कर्बला में शहादत के समय भी अल्लाह को याद किया और उसका शुक्र अदा किया। मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन ने अल्लाह के जिक्र को आम लोगों तक पहुंचाया। मौलाना ने हजरत अली के फज़ायल भी बयान किए। उन्होंने कहा कि हजरत अली ने हक के लिए कई युद्ध लड़े और सभी में सफलता प्राप्त की। अली ने अपना सब कुछ अल्लाह की राह में कुर्बान कर दिया था। मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन के दो भांजे मोहम्मद और औन की शहादत का बयान किया। इसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं।
डुमरियागंज में मोहर्रम की चौथी तारीख पर मर्सिया मजलिस:गाजीपुर के मौलाना उरुज अली ने इमाम हुसैन के फजायल बताए
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