श्रावस्ती के जमुनहा ब्लॉक अंतर्गत नासिरगंज कस्बे में तीसरे मोहर्रम के अवसर पर हुसैनिया इमामबाड़े में शिया समुदाय द्वारा अकीदत के साथ मजलिस का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए शोक व्यक्त किया। मजलिस के दौरान उलेमाओं ने करबला की घटना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उलेमाओं ने कर्बला की उस घटना का वर्णन किया, जब इमाम हुसैन और उनके परिवार को कई दिनों तक पानी से वंचित रखा गया था। मासूम बच्चों की प्यास और कष्ट का उल्लेख होने पर वातावरण गमगीन हो गया और उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। उलेमाओं ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन की शहादत धैर्य, सच्चाई और इंसानियत का संदेश देती है। उन्होंने जोर दिया कि यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि हर युग के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना आवश्यक है। मजलिस के समापन पर नौहा और मातम का आयोजन किया गया, जिसमें अकीदतमंदों ने सीना ज़नी कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था सुदृढ़ रही, जिससे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल बना रहा।
हुसैनिया इमामबाड़े में तीसरे मोहर्रम पर मजलिस:उलेमा बोले- इमाम हुसैन की शहादत धैर्य, सच्चाई और इंसानियत का संदेश देती है
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