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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: एसआईटी जांच में कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में, रिपोर्ट जल्द सौंपे जाने की संभावना


अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के प्रबंधन और जमा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक पड़ताल में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, चढ़ावे की राशि के संग्रह, गणना और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई है। जांच एजेंसी ने इस दौरान विभिन्न कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए हैं।13 जून को गठित एसआईटी ने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की थी। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन सहित टीम के सदस्यों ने कई दिनों तक रिकॉर्ड का परीक्षण करने के साथ संबंधित लोगों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपी जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ व्यक्तियों ने चढ़ावे की राशि के प्रबंधन से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। जांच में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और प्रबंधन से संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि करीब 150 लोगों से पूछताछ की गई, जबकि कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। कुछ मामलों में लापरवाही और प्रक्रियागत खामियों के संकेत मिलने की बात कही जा रही है।
–  राम मंदिर प्रबंधन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने एक साक्षात्कार में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर का संचालन अब बड़े संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है और इसके लिए स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यों का स्पष्ट विभाजन, जिम्मेदारियों का निर्धारण तथा पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए ताकि संचालन और निगरानी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।गौरतलब है कि मामले की जांच करने वाली एसआईटी टीम अयोध्या से लखनऊ लौट आई है और हो सकता है कि सोमवार को  एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दे। इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी अथवा दोष तय किया जा सकेगा।

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