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अगस्त के पहले सोमवार से सावन की शुरुआत, हर-हर महादेव के गूंजेंगे जयकारे

  • सावन का प्रथम सोमवार 3 अगस्त को

जयपुर। भगवान महादेव की उपासना का पावन श्रावण मास प्रारंभ हो चुका है। इस बार सावन का प्रथम सोमवार 3 अगस्त को आ रहा है, जो बेहद खास और फलदायी माना जा रहा है। इस दिन सोमवार के साथ नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस विशेष महासंयोग पर राजधानी जयपुर के सभी प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक, पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सावन के पहले सोमवार को लेकर शिवभक्तों में भारी उत्साह है। शहर के मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अग्रिम बुकिंग पूरी हो चुकी है। तड़के से ही शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजेंगे। दिनभर रुद्रपाठ, भजन-कीर्तन, सहस्त्रधाराभिषेक और कांवड़ियों द्वारा लाए गए पवित्र जल से जलाभिषेक का क्रम चलेगा।

ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार, सावन सोमवार और नागपंचमी का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ है। सोमवार महादेव को प्रिय है और नाग देवता उनके गले की शोभा हैं। शास्त्रों में इसे ‘अक्षय एवं संजीवनी महायोग’ कहा गया है।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष, मांगलिक दोष या राहु-केतु की अशुभ दशा चल रही हो, वे इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध व पंचामृत चढ़ाएं। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, भांग और चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इससे ग्रह दोषों की शांति होती है और अक्षय पुण्यफल प्राप्त होता है।

समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को जब भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया, तो विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जल, दूध, दही, घी और शहद (पंचामृत) से अभिषेक किया था। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा है। मान्यता यह भी है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन माह में ही कठोर तपस्या की थी।

सावन मास के चारों सोमवार शिव भक्ति के लिए विशेष फलदायी रहेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त को नागपंचमी के दुर्लभ महायोग के साथ शुरू होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, तीसरा सोमवार 17 अगस्त को तथा चौथा एवं अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को आएगा। इन तिथियों पर श्रद्धालु व्रत, अभिषेक, रुद्रपाठ और विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। पूरे सावन मास में शिवालयों में धार्मिक आयोजनों और कांवड़ यात्राओं का दौर निरंतर जारी रहेगा।

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