श्रावस्ती जनपद के इकौना स्थित जगतजीत इंटर कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित बोधी पथ कार्यशाला का दूसरा दिन संपन्न हुआ। इस दौरान पर्यावरण पर भगवान बुद्ध के दृष्टिकोण पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम में पर्यावरण विद् प्रवीण कुमार बौद्ध मुख्य अतिथि रहे, जबकि राजकीय इंटर कॉलेज इकौना के प्रधानाचार्य तौकीर अहमद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम बिहारी वाजपेई ने की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्यावरण विद् प्रवीण कुमार बौद्ध ने कहा कि पर्यावरण के प्रति भगवान बुद्ध का दृष्टिकोण गहन अंतर्संबंध, करुणा और सतत उपभोग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि बुद्ध का मानना था कि मनुष्य और प्रकृति अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्रवीण कुमार बौद्ध ने जोर दिया कि प्रकृति को नुकसान पहुँचाने का अर्थ स्वयं को नुकसान पहुँचाना है। बुद्ध के अनुसार, सभी सजीव और निर्जीव तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानाचार्य राम बिहारी वाजपेई ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध धर्म में ‘अहिंसा’ और ‘करुणा’ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो पर्यावरण को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि अत्यधिक उपभोग और लालच को पर्यावरण संकट का मूल कारण माना गया है। बुद्ध के अनुसार, मनुष्य को प्रकृति का दोहन मधुमक्खी की तरह करना चाहिए, जो फूल को नुकसान पहुँचाए बिना केवल पराग एकत्र करती है। राजकीय इंटर कॉलेज इकौना के प्रधानाचार्य तौकीर अहमद ने कहा कि भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधिवृक्ष के नीचे) और महापरिनिर्वाण सभी प्रकृति की गोद में हुए। उन्होंने स्वयं भिक्षुओं को वनों, वृक्षों और एकांत प्राकृतिक स्थानों पर समय बिताने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर हनुमान प्रसाद और राजेश कुमार द्विवेदी सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
श्रावस्ती के इकौना में बोधी पथ कार्यशाला का दूसरा दिन:पर्यावरण पर बुद्ध के दृष्टिकोण पर हुई चर्चा
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