सिद्धार्थनगर के पथरा तहसील क्षेत्र के ग्राम डोकरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक आचार्य हरेंद्र त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह से जुड़ी झांकी प्रस्तुत की गई। इसे देखकर पूरा पंडाल ‘श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठा। भजन-कीर्तन के सुरों पर श्रोता झूमते नजर आए। कथा व्यास ने अपने प्रवचन में भगवान पर अटूट विश्वास रखने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि भक्तों का भगवान पर अटूट विश्वास है, तो वे हर स्थिति में उनकी रक्षा करते हैं। आचार्य हरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी के साथ संपन्न हुआ था। रुक्मिणी ने देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य और गुणों की प्रशंसा सुनकर उनसे विवाह करने का निश्चय किया था। रुक्मिणी के बड़े भाई रुक्मी की श्रीकृष्ण से शत्रुता थी और वह अपनी बहन का विवाह राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया। इस अवसर पर मुकेश मां गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, अटल बिहारी दुबे, धर्मेंद्र गिरी सहित कई पत्रकार और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डोकरा में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन:आचार्य हरेंद्र त्रिपाठी ने सुनाया श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग
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