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शिवराज सिंह ने कृषि सम्मेलन का किया शुभारम्भ,बोले कृषि का रोडमैप बनाकर करें कार्य 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को सेन्ट्रम होटल में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का दीप जलाकर शुभारम्भ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लक्ष्य की पूर्ति के लिए प्रत्येक राज्य कृषि का रोडमैप बनाकर कार्य करें। इसके अलावा नकली खाद व नकली पेस्टीसाइड के खिलाफ प्रभावी अभियान लेकर राज्य कठोर कार्रवाई कराएं।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में खाद्यान्न उत्पादन में नंबर एक है। यहाँ की मिट्टी, यहाँ की जलवायु, यहाँ के मेहनती किसान उसके साथ हिमाचल, उत्तराखण्ड, जम्मू काश्मीर, वहां के फल, फूल, सब्जियां विशेष हैं। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर की स्थापना करने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि के मामले में हमारे तीन बड़े लक्ष्य हैं। पहला देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना। दूसरा किसान की आय बढ़ाना और तीसरा पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना। इसको लेकर हम उत्पादन बढ़ाने, उत्पादन की लागत कम करने, किसान को उचित कीमत दिलाने, नुकसान हो जाय तो उसकी भरपाई हो जाय, इसके साथ कृषि का विविधीकरण जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने खेती में अंधाधुंध उर्वरकों के उपयोग पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इससे मिट्टी का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसके लिए हमको प्राकृतिक व जैविक खेती की ओर भी बढ़ना चाहिए। किसानों को फल, सब्ज व औषधीय खेती भी करनी चाहिए। कहा कि बीज हमारा आधार है। जलवायु के अनुकूल हमें बीज चाहिए। इसके लिए देश के अलग-अलग स्थानों पर सीड सेन्टर स्थापित किये जा रहे हैंं।
उन्होंने बताया कि देश के अन्न के भण्डार हमने भरकर रखे हैं। 

दुनिया में कहीं से मंगाने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि हम चावल उत्पादन में नंबर एक हैं। चीन को हमने पीछे छोड़ दिया है। कभी हम लाल गेहूं अमेरिका से मंगाते थे। आज हमारे बासमती की महक कनाडा से लेकर अमेरिका तक लोगों को लुभा रही है। हमारा लगातार उत्पादन बढ़ रहा है। लेकिन 140 करोड़ से ज्यादा आबादी हमारी है। इसके लिए रोडमैप बनाकर आगे बढ़ें। हम अपने देश की कृषि को कैसे उन्न्त स्थिति में ले जाएं। हम छोटी जोत के आधार पर अनाज के साथ पशुपालन, बकरीपालन, मछलीपालन कर सकते हैं। वृक्ष आधारित खेती करें।

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