नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर अपने पहले के आदेश में किसी भी संशोधन से इनकार किया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने 7 नवंबर 2025 के दिए अपने आदेश को बरकरार रखा है।
उच्चतम न्यायालय ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड की ओर से आवारा जानवरों को लेकर जारी की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर की वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि एनमिल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) के नियम 2001 में लागू किए गए थे। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुरुप इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं किया गया। इस संबंध में किए गए प्रयासों में गंभीरता और ठोस योजना का अभाव दिखा। नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी बिना किसी व्यापक रणनीति के चलाए जाते रहे जिससे इस व्यवस्था के मूल उद्देश्य ही प्रभावित हुए।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एबीसी ढांचे को प्रभावी तरीके से लागू करने में हुई गंभीर लापरवाही के कारण आवारा कुत्तों की समस्या और विकराल होती गई है। न्यायालय ने कहा कि देश भर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक केवल राजस्थान के श्रीगंगानर शहर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने के 1084 मामले सामने आए। कई मामलों में छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आयी और यहां तक कि उनके चेहरे तक नोच डाले गए। न्यायालय ने कहा कि तमिलनाडु में साल के शुरुआती चार महीनों में करीब दो लाख कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के बधियाकरण, कुत्तों के लिए शेल्टर होम स्थापित करने और शैक्षणिक और दूसरी संस्थाओं के कैंपसों से उन्हें हटाने के लिए अपर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहने पर राज्य सरकारों से नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने असम की स्थिति पर आश्चर्य जताते हुए कहा था कि 2024 में राज्य में कुत्तों के काटने की 1.66 लाख घटनाएं घटी थीं लेकिन राज्य में केवल एक डॉग सेंटर था। गुजरात में कुत्तों के लिए शेल्टर होम्स की कोई सूचना नहीं मिली। उच्चतम न्यायालय ने झारखंड राज्य के हलफनामा पर गौर करते हुए कहा था कि पिछले दो महीने में 1.6 लाख कुत्तों के बधियाकरण की सूचना गलत लग रही है। दिल्ली के हलफनामे में कहा गया था कि 8 महीने में 68 हजार कुत्तों का बधियाकरण किया गया। ऐसे में एक साल में 80 हजार कुत्तों का ही बधियाकरण होगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस गति से आवारा कुत्तों की आबादी पर लगाम नहीं लगाया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर पुराने आदेश में बदलाव से किया इनकार
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












