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बस्ती में एक महिला शिक्षिका पर फर्जी बीएड प्रमाण पत्र के आधार पर 25 साल तक नौकरी करने का आरोप लगा है। यह मामला नगर थाना क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक परमहंस बाबा राम किंकर दास बालिका विद्यालय से संबंधित है। विद्यालय के प्रबंधक संजय सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय, बस्ती में इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। प्रकरण की जांच एसएसपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), विभूति खंड, गोमतीनगर, लखनऊ द्वारा की गई। जांच के दौरान गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने 28 अगस्त 2021 को एक सत्यापन रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि संबंधित बीएड प्रमाण पत्र का अनुक्रमांक किसी भी छात्र-छात्रा को आवंटित नहीं किया गया था, जिसके आधार पर प्रमाण पत्र को फर्जी माना गया। जब विद्यालय प्रबंधन ने शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा, तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वर्ष 2000 में बीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से बीएड परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद संबंधित कॉलेज से दोबारा सत्यापन कराया गया। 28 अक्टूबर 2024 को प्राप्त रिपोर्ट में तत्कालीन प्राचार्य के हस्ताक्षर कूट रचित (फर्जी) पाए गए, जिससे प्रमाण पत्र की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्टों के आधार पर महिला शिक्षिका के बीएड प्रमाण पत्र को फर्जी पाया। न्यायालय ने उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए नगर थाना पुलिस को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई और विवेचना करने का आदेश दिया है। न्यायालय के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोगों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब पुलिस मुकदमा दर्ज कर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेगी।
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शिक्षिका ने फर्जी बीएड से 25 साल की नौकरी:बस्ती में CJM को दिया प्रार्थना पत्र, कोर्ट के आदेश पर दर्ज होगा मुकदमा
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