अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद के वर्ष 2013 के चर्चित राजू ठक्कर पुलिस हिरासत मौत मामले में आज शनिवार को अहमदाबाद की भद्र सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश एम.पी. पुरोहित ने सरदार नगर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन पीएसआई बाबू पटेल सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपितों के खिलाफ हत्या, गैरकानूनी हिरासत और अन्य गंभीर आरोपों के पर्याप्त व ठोस सबूत रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए जा सके। ऐसे में सभी आरोपितों को निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया गया।क्या था मामला?वर्ष 2013 में एक घरफोड़ चोरी के मामले की जांच के दौरान पुलिस को आशाबेन राजूभाई ठक्कर के नाम पर रजिस्टर्ड एक मोबाइल फोन मिला था। इसके आधार पर पुलिस ने राजू उर्फ क्रांति ठक्कर की तलाश शुरू की।
8 मई 2013 को सारंगपुर ब्रिज के नीचे से राजू को हिरासत में लिया गया था। पुलिस पर आरोप था कि चोरी कबूल करवाने के लिए उसे अजितमिल चौकी में उसे गैरकानूनी रूप से रखकर बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस पर यह भी आरोप लगाया गया था कि सबूत मिटाने के लिए शव को साबरमती नदी में फेंक दिया गया था। इस मामले में कुल 8 आरोपित थे, जिनमें से एक आरोपित अशोकभाई भट्ट का ट्रायल के दौरान निधन हो गया था, जिसके चलते उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया।
गुजरात के राजू ठक्कर हिरासत मौत मामले में पीएसआई समेत 7 पुलिसकर्मी बरी
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