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सादगी, साहस और जनसंवाद के प्रतीक थे चंद्रशेखर , नातिन ने साझा की यादें

लखनऊ। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और जनहित के प्रति समर्पण के लिए आज भी याद किया जाता है। उनकी नातिन नीलम सिंह ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वे कभी भी दिखावे, रोड शो या प्रचार के भूखे नहीं रहे, बल्कि हमेशा आम जनता के हितों को प्राथमिकता दी।

नीलम सिंह के मुताबिक, बलिया के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखर जी ने जीवन भर देश के जवानों, किसानों और आम नागरिकों के सम्मान की बात पूरी निर्भीकता से उठाई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका व्यवहार बिल्कुल सामान्य रहा। जब भी वे बलिया आते थे, तो सुरक्षा के तामझाम से दूर रहकर आम लोगों से सीधे मिलते-जुलते थे और उनकी समस्याओं को समझते थे।

उन्होंने यह भी बताया कि चंद्रशेखर जी को सादा भोजन बेहद पसंद था, जिसमें कढ़ी-चावल, बेसन की सब्जी और बाटी-चोखा शामिल था। उनके जीवन में सादगी केवल दिखावे तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह उनके व्यवहार और सोच में भी झलकती थी।

नीलम सिंह के पति अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि चंद्रशेखर जी परिवार के लोगों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि जब तक बहुत जरूरी न हो, राजनीति में नहीं आना चाहिए, लेकिन यदि जनता की आवाज दबाई जा रही हो, तो ईमानदारी से लोगों के अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए।

गौरतलब है कि चंद्रशेखर जी का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। वे देश के 8वें प्रधानमंत्री रहे और 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक उन्होंने पद संभाला। “युवा तुर्क” के नाम से प्रसिद्ध चंद्रशेखर जी समाजवादी विचारधारा के प्रखर नेता थे। उन्होंने 1983 में कन्याकुमारी से राजघाट तक पदयात्रा कर देश की जमीनी हकीकत को समझने का प्रयास भी किया था।आज भी भारतीय राजनीति में Chandra Shekhar का व्यक्तित्व सादगी, साहस और जनसेवा के प्रतीक के रूप में प्रेरणा देता है।

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