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भीषण गर्मी में बिजली संकट से हाहाकार, बीकेटी में रातभर सड़कों पर रहे लोग

बख्शी का तालाब। थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाके में बिजली विभाग की घोर लापरवाही और तानाशाही ने इस समय विकराल रूप ले लिया है। एक तरफ आसमान से आग बरस रही है और उमस ने लोगों का दम घोंट रखा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग की अघोषित और मनमानी कटौती ने स्थानीय नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि, जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जबकि जनता बूंद-बूंद पसीने में नहाकर तड़पने को मजबूर है।

शनिवार की रात बड़ी बाजार इलाके के सब्र का बांध उस समय पूरी तरह टूट गया, जब रात ठीक 11:30 बजे से लेकर तड़के 2:30 बजे तक बिजली विभाग ने आंख-मिचौली का ऐसा नंगा नाच दिखाया जिसने सैकड़ों परिवारों को खून के आंसू रुला दिए। इस तीन घंटे के दौरान हर दो मिनट पर लाइट आती और जाती रही। इस भयंकर पावर ट्रिपिंग के कारण घरों में लगे कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फ्रिज, और एसी धड़ाधड़ फुंकने लगे। उमस और मच्छरों के जानलेवा हमले के बीच जब घरों के भीतर दम घुटने लगा, तो बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत सैकड़ों लोग चीखते-चिल्लाते हुए आधी रात को सड़कों पर उतर आए। लोगों ने रातभर जागकर, सड़कों पर टहलकर जैसे-तैसे अपनी जान बचाई।

बड़ी बाजार के स्थानीय व्यापारियों और संभ्रांत नागरिकों का साफ कहना है कि, बिजली विभाग की यह अकर्मण्यता अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है। दिन के समय अघोषित कटौती से पूरा व्यापार ठप पड़ा है और रात को ट्रिपिंग से लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। जब रात में परेशान नागरिक बिजली उपकेंद्र (सब-स्टेशन) के नंबरों पर फोन करते हैं, तो या तो फोन बंद कर दिए जाते हैं या फिर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। जनता का आरोप है कि, लाइनमैन से लेकर ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी सिर्फ कागजों पर ‘निर्बाध बिजली’ का दावा ठोक रहे हैं, जबकि हकीकत में जनता को नरक भोगने के लिए छोड़ दिया गया है।

बड़ी बाजार की पीड़ित जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि, यदि इस अघोषित कटौती और जानलेवा ट्रिपिंग को 24 घंटे के भीतर ठीक नहीं किया गया, तो क्षेत्र के हजारों लोग सड़कों को जाम करेंगे और अधिशासी अभियंता कार्यालय का ऐसा उग्र घेराव करेंगे जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी। जनता अब खोखले आश्वासनों से मानने वाली नहीं है, उसे हर हाल में चैन की नींद और अपनी गाढ़ी कमाई की बिजली चाहिए।

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