- मुम्बई की बाणगंगा और मीठी नदी को स्वच्छ और निर्मल रखने हेतु किये जा रहे प्रयासों की सराहना
- स्वच्छ नदियाँ ही स्वस्थ समाज और जागृत राष्ट्र की आधारशिला: चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। महाराष्ट्र सरकार की केबिनेट मंत्री, पंकजा मुंडे का विश्व विख्यात परमार्थ निकेतन आश्रम में दर्शनार्थ आगमन हुआ। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में पंकजा मुंडे ने माँ गंगा की दिव्य गंगा आरती में सहभाग कर उस आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
स्वामी ने आगामी नासिक महाकुम्भ के आयोजन को लेकर विशेष चर्चा की। इस दौरान मुम्बई की प्राचीन बाणगंगा और मीठी नदी को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाये रखने हेतु किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि बाणगंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नदियों की स्वच्छता केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा संकल्प है। स्वच्छ नदियाँ ही स्वस्थ समाज और जागृत राष्ट्र की आधारशिला हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि चेतना का प्रवाह है। हमारी नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि संस्कृति की जीवनरेखाएँ हैं। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी मानवता का भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व पर्यावरण संकट, जल संकट और मानसिक अशांति से जूझ रहा है, ऐसे समय में भारत की सनातन जीवनशैली ही विश्व को संतुलन और समाधान दे सकती है।
इस अवसर पर पंकजा मुंडे ने परमार्थ निकेतन द्वारा संचालित जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं वैश्विक स्तर पर चलाये जा रहे जनजागरण अभियानों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने इन प्रकल्पों पर आधारित प्रेरणादायक शॉर्ट फिल्म का अवलोकन भी किया और कहा कि परमार्थ निकेतन जनचेतना का वैश्विक केंद्र है, जहाँ अध्यात्म, धरातल पर सेवा के रूप में दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि किस प्रकार परमार्थ निकेतन अध्यात्म और पर्यावरण को एक सूत्र में पिरोकर नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल विकास की नहीं, बल्कि संतुलित और संस्कारित विकास की है, जिसमें प्रकृति, संस्कृति और मानवता साथ-साथ आगे बढ़ें।
डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि आज दुनिया तकनीक से जुड़ रही है, लेकिन भीतर से टूट रही है। भारत का अध्यात्म मानव को स्वयं से, समाज से और प्रकृति से पुनः जोड़ने की शक्ति रखता है। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व सेवा और संवेदना से प्रेरित होता है, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित होता है। स्वामी ने पंकजा मुंडे और विधायक श्वेता महाले को रूद्राक्ष का पावन पौधा एवं परमार्थ निकेतन का सद्साहित्य भेंट कर उनका अभिनन्दन किया।












