— उत्तर प्रदेश संयुक्त कर्मचारी परिषद ने दिया खुला समर्थन

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कर्मचारियों का आक्रोश उस समय विस्फोटक रूप में सामने आया जब अपनी लंबित समस्याओं, बाधित कार्यों एवं लगातार बढ़ रही प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के समाधान के लिए समस्त कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से कुलसचिव से मिलने के लिए एकत्रित हुए। सुबह से लगभग 44 डिग्री की भीषण गर्मी एवं प्रचंड धूप में कर्मचारी घंटों तक वार्ता की प्रतीक्षा करते रहे,लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना तक उचित नहीं समझा गया। कर्मचारियों का आरोप है कि कुलसचिव का लगातार नकारात्मक, हठधर्मी, असंवेदनशील एवं कर्मचारी विरोधी रवैया वर्षों से संस्थान में तनाव,अव्यवस्था एवं असंतोष का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। कर्मचारियों के आवश्यक कार्यों को अनावश्यक रूप से रोकना,फाइलों को लंबित रखना, समस्याओं का समाधान न करना तथा संवाद से लगातार बचना अब कर्मचारियों के धैर्य की सीमा को तोड़ चुका है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुलपति के प्रतिनिधि एवं केजीएमयू के प्रवक्ता डाक्टर केके सिंह द्वारा मध्यस्थता एवं संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया। उनके हस्तक्षेप के बाद ब्राउन हॉल में बैठक आयोजित की गई, जहां कर्मचारी लगभग एक घंटे तक समाधान की उम्मीद में बैठे रहे,लेकिन कुलसचिव अपने अड़ियल एवं असहयोगात्मक रवैये के कारण बैठक में उपस्थित नहीं हुईं। इससे कर्मचारियों में भारी रोष, अपमान एवं उपेक्षा की भावना और अधिक गहरा गई।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुलसचिव की नकारात्मक कार्यशैली के कारण न केवल प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि संस्थान की स्वास्थ्य सेवाएं एवं मरीजों के हित भी प्रभावित हो रहे हैं। आज की स्थिति में अस्पताल की नियमित व्यवस्था बाधित हुई तथा मरीजों एवं तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते संवेदनशीलता एवं सकारात्मक संवाद का परिचय दिया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं रखने आए कर्मचारियों के बीच अनावश्यक रूप से पुलिस व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया, जिससे अस्पताल परिसर में भय, तनाव एवं अव्यवस्था का माहौल बन गया। इसका प्रतिकूल प्रभाव मरीजों, तीमारदारों एवं कर्मचारियों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। कर्मचारियों ने इसे चिकित्सा संस्थान की गरिमा एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत बताया। इस आंदोलन को उत्तर प्रदेश संयुक्त कर्मचारी परिषद का विशेष एवं मजबूत समर्थन प्राप्त हुआ। परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया तथा कर्मचारियों की मांगों को पूरी तरह न्यायोचित बताते हुए प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की। आंदोलन में अध्यक्ष विकास सिंह, उपाध्यक्ष के.पी. श्रीवास्तव, सोनू वाल्मीकि, भीम सिंह बघेल, महामंत्री अनिल कुमार, मंत्री शैलेंद्र कुमार उर्फ भिंडी, संयुक्त मंत्री राम दल बारी, संयुक्त मंत्री फ़ैज़ अहमद उर्फ दुबे, कोषाध्यक्ष उमाशंकर, प्रचार मंत्री सुभाष सहित भारी संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति रही।












